सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के 'अर्धसत्य' औ

सीएम योगी: 'सोशल मीडिया के अर्धसत्य से दुनिया अवसाद की शिकार, श्रीमद्भागवत कथा दूर करती है भ्रम'

File Photo of CM Yogi Adityanath

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने सत्य और असत्य के बीच ‘अर्धसत्य’ की एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जो कभी सत्य नहीं हो सकती। इस अर्धसत्य के कारण आज पूरी दुनिया की मानवता अवसाद (डिप्रेशन) की शिकार है और उसके सामने एक गंभीर चुनौती है। सीएम योगी बुधवार अपराह्न गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

सोशल मीडिया का अर्धसत्य और वैश्विक अवसाद का संकट

गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में व्यासपीठ का पूजन करने के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "सामान्य जीवन में व्यक्ति के लिए यह तय करना कठिन होता है कि सत्य क्या है और असत्य क्या है, लेकिन आज सोशल मीडिया ने अर्धसत्य का एक नया तथ्य खड़ा कर दिया है। इस अर्धसत्य के कारण पूरी दुनिया की मानवता अवसाद की शिकार है और उसके सामने गंभीर चुनौती है।"

वैज्ञानिक प्रगति के दौर में भारत की ज्ञान परंपरा

सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि आज विश्व भले ही विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण प्रगति कर चुका हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति के लिए पूरी दुनिया केवल भारत भूमि की ओर ही देखती है। उन्होंने कहा कि "भारत भूमि पर पावन कथाओं की परंपरा कठिन से कठिन चुनौतियों में व्यक्ति का मार्ग सुगम बनाती है। पवित्र कथाओं के वाचन और श्रवण की यह परंपरा हजारों वर्षों की सनातन विरासत को समझने और आत्मसात करने का एक दुर्लभ अवसर है।"

‘मनसा, वाचा, कर्मणा’ की एकरूपता और भ्रम का निवारण

जीवन दर्शन की व्याख्या करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब व्यक्ति के विचारों और आचरण के बीच सामंजस्य होता है, तभी उसे वास्तविक सफलता प्राप्त होती है। "व्यक्ति जब मनसा, वाचा, कर्मणा से एक ही दिशा में आगे बढ़ता है तो सफलता उसका वरण करती है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता न रहने पर भ्रम पैदा होता है, जिससे व्यक्ति 'न घर का, न घाट का' जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के इसी वैचारिक भ्रम को दूर करती है।"

5,000 वर्षों पुरानी कथा परंपरा और निष्काम कर्म का संदेश

कथा के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के श्रवण की परंपरा 5,000 वर्ष पुरानी है, जिसकी शुरुआत शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को कथा सुनाने से हुई थी। "तमाम सम-विषम परिस्थितियों, उत्थान-पतन और चुनौतियों का सामना करने के बावजूद सनातन संस्कृति ने इस कथा को अपनी स्मृतियों में बचाकर रखा। यह कथा भारत के श्रद्धालु को ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है तथा अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।"

कथा व्यास का गोरक्षपीठ में अभिनंदन

इस सात दिवसीय ज्ञानयज्ञ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कथा व्यास के रूप में वृंदावन से पधारे मलूकपीठाधीश्वर श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज का गोरक्षपीठ में भावपूर्ण अभिनंदन किया।

वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के बीच भव्य शोभायात्रा

कथा के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शंख ध्वनि की गूंज और वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शोभायात्रा कथा स्थल पहुंची, जहां अखंड ज्योति स्थापित की गई। इसके उपरांत पोथी प्रतिष्ठा और कथा व्यास के विराजमान होने पर सीएम योगी एवं अन्य यजमानों ने व्यासपीठ और कथा व्यास का विधि-विधान से पूजन किया।

29 सितंबर तक चलेगा कथा का रसमय अनुष्ठान

वृंदावन के पूज्य कथा व्यास स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया जा रहा है। गोरक्षपीठ में यह कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस पावन धार्मिक अनुष्ठान का विराम 29 सितंबर को होगा।

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