राहुल गांधी के मानहानि मामले में शिकायतकर्ता का बड़ा बयान, कहा- गोपाल और नाथूराम गोडसे RSS के सक्रिय सदस्य थे
पुणे (महाराष्ट्र): कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में शिकायतकर्ता सत्याकी सावरकर ने पुणे की एक अदालत में महत्वपूर्ण बयान दिया। राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मिलिंद पवार ने बताया कि जिरह के दौरान सत्याकी सावरकर ने कहा कि उनके दादा गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सक्रिय सदस्य थे।
अदालत में दर्ज हुआ बयान
यह बयान पुणे की अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अमोल श्रीराम शिंदे के समक्ष दर्ज हुआ। गांधी के वकील अधिवक्ता मिलिंद डी. पवार ने सत्याकी सावरकर से जिरह की। अदालत में दर्ज बयान के अनुसार, सत्याकी ने कहा, "यह सत्य है कि मेरे दादा गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे।"
सावरकर ने परिवार के रिश्तों की दी जानकारी
सत्याकी सावरकर ने अदालत को बताया कि गोपाल गोडसे उनके नाना और उनकी मां के पिता थे, जबकि सिंधु गोडसे उनकी नानी थीं। उन्होंने बताया कि उनकी मां हिमानी सावरकर थीं। जिरह के दौरान सत्याकी ने कहा कि गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे सगे भाई थे और नाथूराम गोडसे उनके चचेरे भाई-दादा थे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता विनायक दामोदर सावरकर के भतीजे थे।
सावरकर और गोडसे परिवार के ऐतिहासिक संबंध का जिक्र
सत्याकी ने आगे कहा कि सावरकर और गोडसे रिश्तेदार थे और दोनों परिवारों के बीच ऐतिहासिक संबंध था। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी नहीं है। उन्हें यह भी नहीं पता कि दोनों परिवारों से जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध हैं या नहीं।
मां और दादा हिंदू महासभा के लिए करते थे काम
अदालत में सत्याकी ने बताया कि उनकी मां का निधन 2015 में पुणे में हुआ था, जबकि उनके दादा गोपाल गोडसे का निधन 2007 में पुणे में हुआ था। उनके बयान के अनुसार, उनकी मां और दादा अपनी मृत्यु तक हिंदू महासभा के लिए काम करते रहे।
हिंदू महासभा की स्थापना को लेकर बयान
कार्यवाही के दौरान सत्याकी ने कहा कि हिंदू महासभा एक राजनीतिक दल था और इसकी स्थापना मदन मोहन मालवीय ने 1915 में की थी। उन्होंने आगे बताया कि उस समय विनायक दामोदर सावरकर अंडमान जेल में थे। सावरकर की रिहाई को लेकर पूछे गए सवाल पर सत्याकी ने इस बात से इनकार किया कि अंग्रेजों ने उन्हें 1924 में सशर्त रिहा किया था। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि सावरकर को 1937 में पूरी तरह से रिहा कर दिया गया था।
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला
सत्याकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों के संबंध में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मामले की सुनवाई मंगलवार को स्थगित कर दी गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
(एएनआई)
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