कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मंगलवार को अ

कांग्रेस CWC ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग की, ‘वोट चोरी’ का लगाया आरोप

Congress CWC Seeks CEC’s Resignation, Demands Halt to SIR

नई दिल्ली [भारत]: कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मंगलवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में कई प्रस्ताव पारित किए। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को निलंबित करने और पार्टी के दावे के अनुसार मतदाता सूची से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को बहाल करने की मांग की गई है।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता

सीडब्ल्यूसी ने कहा कि उसने उन रिपोर्टों पर चर्चा की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आरएसएस-भाजपा ने मौजूदा सीईसी के नेतृत्व में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के कथित समर्थन से चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया है। कांग्रेस ने इसे "हमारे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा" बताया। पार्टी ने कहा कि इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की "वोट चोरी" को लेकर दी गई चेतावनी को सही साबित किया है। पार्टी ने आदर्श आचार संहिता के कथित चयनात्मक प्रवर्तन, ईवीएम की निष्पक्षता, मतदाता सूची में नामों के जोड़-घटाव, सीईसी की नियुक्ति की बदली हुई प्रक्रिया और सीईसी को आजीवन छूट दिए जाने से जुड़ी उनकी चिंताओं का भी हवाला दिया।

सीईसी पर अन्य चुनाव आयुक्तों से सलाह नहीं लेने का आरोप

कांग्रेस समिति ने उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया है कि चुनाव आयोग एक व्यक्ति के नियंत्रण में आ गया है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों से उचित परामर्श किए बिना निर्णय ले रहे हैं। प्रस्ताव में उन रिपोर्टों का जिक्र किया गया है, जिनके अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6 में कथित "अनधिकृत" और "अवैध" बदलाव भी शामिल हैं। कांग्रेस ने कहा कि राष्ट्रव्यापी एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों पर कथित रूप से केंद्रीकृत नियंत्रण ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

SIR की संवैधानिक वैधता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस समिति ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता को लेकर भी चिंता जताई। पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के कारण "पहले ही 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं।" कांग्रेस ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया, जिसमें नागरिकों पर अपनी पात्रता साबित करने का बोझ डाला जाता है और जो पर्याप्त पारदर्शी सुरक्षा उपायों के बिना संचालित होती है, संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की गारंटी के अनुरूप नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया, "संदिग्ध संवैधानिक वैधता वाली प्रक्रिया को यह तय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कौन मतदान कर सकता है।"

कांग्रेस ने अपने अभियानों और कानूनी कदमों का किया जिक्र

कांग्रेस समिति ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मार्गदर्शन और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनता और विभिन्न मंचों तक पहुंचाया है। पार्टी ने बिहार में मतदाता अधिकार यात्रा, देशव्यापी वोट चोरी अभियान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस, ईगल समूह, चुनाव आयोग के साथ बातचीत, प्रक्रियात्मक बदलावों पर लिखित आपत्तियां, एसआईआर को कानूनी चुनौती, संसद में इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन और चुनाव आयोग तक मार्च का जिक्र किया। प्रस्ताव में कहा गया, "एक व्यक्ति की अकेली चेतावनी से शुरू हुई बात अब पारदर्शिता और जवाबदेही की राष्ट्रीय मांग बन गई है।"

CEC के इस्तीफे और SIR निलंबन की मांग

इसके बाद कांग्रेस समिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्होंने "अपनी सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार खो दिए हैं।" कांग्रेस ने एसआईआर को तत्काल निलंबित करने की भी मांग की। पार्टी ने इस प्रक्रिया के जरिए तैयार की जा रही मतदाता सूचियों की सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता के साथ-साथ इसकी "संवैधानिक वैधता" पर सवाल उठाए। पार्टी ने मतदाता सूचियों से हटाए गए "13 करोड़ 30 लाख नामों" को तत्काल बहाल करने की मांग भी की। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया, "प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा यह बेशर्म वोट चोरी आयोजित की गई है। उनके इस्तीफे के बिना हमारे संविधान और कठिन परिश्रम से अर्जित लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।"

संसद, अदालत और सड़क पर विरोध जारी रखने की बात

समिति ने कहा कि कांग्रेस संसद, अदालतों और सड़कों पर इस "जनमत के हनन" का विरोध तब तक जारी रखेगी, जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता और चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण के रूप में बहाल नहीं कर दिया जाता। प्रस्ताव में कहा गया, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए, भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की बहाली का संघर्ष स्वयं स्वतंत्रता संग्राम से कम नहीं है। और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह संघर्ष अपने उचित निष्कर्ष तक पहुंचे।"

खड़गे ने CEC पर लगाए गंभीर आरोप

इससे पहले दिन में, सीडब्ल्यूसी की बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मोदी सरकार की "कठपुतली" बनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों उसके निर्णयों पर समान रूप से भरोसा कर सकें। खड़गे ने कहा, "सोची-समझी साजिश के तहत मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं।" उन्होंने एसआईआर से संबंधित निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और पूछा कि कथित तौर पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया। खड़गे ने कहा, "क्या यह पूछना गलत है कि एसआईआर का निर्णय किसने लिया? क्या यह पूछना गलत है कि दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया? क्या कोई गुप्त प्रक्रिया चल रही थी?"

खड़गे ने रखीं पांच मांगें

खड़गे ने पार्टी की पांच मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूचियों में हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा प्रकाशित करना, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं उन्हें पूरी जानकारी और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियों और संबंधित आवश्यक डेटा तक सरल प्रारूप में समय पर पहुंच देना, गंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करना तथा चुनाव प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में पारदर्शिता बनाए रखना शामिल है। उन्होंने कहा कि 2027 में पांच राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले ये उपाय जरूरी हैं, ताकि किसी भी मतदाता के अधिकारों का उल्लंघन न हो और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बरकरार रहे।

रिपोर्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर अभ्यास से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां उठाई थीं। इस बीच, चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया है कि रिपोर्ट में बताई गई आपत्तियां संस्थागत असहमति का प्रतिनिधित्व करती हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर से संबंधित निर्णय आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।

(एएनआई)

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