राम मंदिर ट्रस्ट में कथित चंदा चोरी पर कांग्रेस का हमला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
नई दिल्ली: कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मामले में बड़े नेताओं और ट्रस्ट के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं का दावा
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में नवंबर 2020 में तैयार की गई एक निजी ऑडिट फर्म की रिपोर्ट का हवाला दिया। उनके मुताबिक, 5 फरवरी, 2020 को ट्रस्ट के गठन के कुछ महीनों बाद ही आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी कमियों को लेकर चेतावनी दी गई थी। रमेश ने दावा किया कि रिपोर्ट में स्पष्ट संगठनात्मक ढांचे और जिम्मेदारियों के निर्धारण की कमी, चंदे का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं होने, वित्तीय लेनदेन और डेटा एंट्री के सत्यापन की व्यवस्था के अभाव तथा योग्य लेखा कर्मचारियों की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों कर्मचारियों के कामकाज के बावजूद औपचारिक मानव संसाधन विभाग नहीं था और सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी के डेटा प्रबंधन सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा और सत्यापन व्यवस्था नहीं थी।
लेनदेन और कीमती दान के लिए SOP बनाने की सलाह
कांग्रेस नेता के अनुसार, ऑडिट फर्म ने चेतावनी दी थी कि कर्मचारियों की कथित कमी और डेटा प्रबंधन में खामियों के कारण गलत रिपोर्टिंग हो सकती है तथा धनराशि का सही ब्योरा सामने नहीं आ पाएगा। रमेश ने दावा किया कि फर्म ने प्रत्येक लेनदेन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और सोने-चांदी के आभूषणों जैसी कीमती गैर-नकद वस्तुओं के लिए उचित स्टॉक रजिस्टर बनाए रखने की सलाह दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सुझावों को लागू नहीं किया गया। रमेश ने राज्य सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) की जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि नकदी गिनने वाले कक्ष से 105 बार बिना अनुमति नकदी निकाली गई और कुछ कर्मचारी कथित तौर पर CCTV कैमरों के सामने खड़े होकर उनकी निगरानी में बाधा डालते थे।
निर्माण कार्यों में 40 प्रतिशत कमीशन का आरोप
विवाद मंदिर निर्माण से जुड़े ठेकों तक भी पहुंच गया है। मंदिर निर्माण परियोजनाओं से पहले जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने कथित तौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी। जयराम रमेश के अनुसार, वर्मा ने आरोप लगाया था कि निर्माण ठेकों पर 40 प्रतिशत कमीशन लिया जा रहा था, आधिकारिक रजिस्टरों में कथित तौर पर फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए जा रहे थे और बिलों में निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ाकर दिखाई जा रही थीं। रमेश ने दावा किया कि इन आरोपों की जांच कराने के बजाय इंजीनियर को पद से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
कीमती दान की रसीदें जारी नहीं होने का दावा
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि भक्तों की ओर से दान की गई कई कीमती वस्तुएं कथित तौर पर आधिकारिक रसीद जारी किए बिना प्राप्त की गईं। रमेश ने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2020 में ही ऑडिट के जरिए कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया था, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि कथित अनियमितताओं की शिकायत करने वाले व्यक्ति को पद से क्यों हटाया गया और दान की गई कीमती वस्तुओं का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों पर भी राजनीतिक निशाना साधा और कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए दान की सुरक्षा और उसके प्रबंधन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
SIT जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने राज्य सरकार की SIT जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच का दायरा सीमित रखा गया और जवाबदेही निचले स्तर के आठ कर्मचारियों तक सीमित करने की कोशिश की गई। पार्टी का कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से पूरे मामले का खुलासा नहीं हो सकता। कांग्रेस ने मांग की कि वित्तीय अनियमितताओं, भूमि सौदों, दान की कथित चोरी और निर्माण ठेकों से जुड़े आरोपों की व्यापक जांच की जाए।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने मांग की है कि:
- * पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- * वर्ष 2020 से अब तक मिले दान, कीमती वस्तुओं, ऑडिट रिपोर्ट और निर्माण ठेकों के बिलों की जांच हो।
- * ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित सभी संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाए।
- * कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
जयराम रमेश ने कहा कि भक्तों की आस्था किसी को जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देती। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर को मिले चंदे और कीमती दान का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए।
(ANI)
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