संविदा कर्मचारियों का आरोप, नवीनीकरण के बजाय मिल रही नौकरी से हटाने की धमकी
सिंगरोली: संविदा नवीनीकरण की कार्रवाई अधर में लटकने के कारण जिले में सैकड़ों संविदा कर्मचारियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। शासन से स्पष्ट निर्देश और मानदेय भुगतान के लिए राशि जारी किए जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। पिछले 5 महीनों से मानदेय न मिलने के कारण कर्मचारी रिश्तेदारों से उधार लेकर किसी तरह जीवन यापन करने को मजबूर हैं, लेकिन अब वहां से भी सहयोग मिलना बंद हो गया है।
कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की दी जा रहीं धमकियां
अधिकारियों और उनके अधीनस्थों के रवैये को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है। आरोप है कि संविदा नवीनीकरण करने के बजाय प्रतिदिन कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे भय और तनाव का माहौल बन गया है। शासन ने समीक्षा बैठकों में कर्मचारियों के नवीनीकरण का पूर्ण विवरण भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन निर्देशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा असर
नवीनीकरण न होने और मानदेय रुकने का सीधा असर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। योजनाएं प्रभावित, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, आवास योजना और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियां ठप हो चुकी हैं। फंड अटका, प्रदेश के अन्य जिलों में संविदा एग्रीमेंट की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और वहां मानदेय के साथ योजनाओं का पैसा आ रहा है, लेकिन सिंगरौली में नवीनीकरण न होने से राशि का आहरण नहीं हो पा रहा है।
न्यायालय का खटखटा सकते हैं दरवाजा
स्व-सहायता समूह की महिलाएं और ग्रामीण पैसों के भुगतान व काम के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कागजों पर सब कुछ सामान्य दिखाने के लिए झूठी प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। परेशान कर्मचारियों का कहना है कि यदि यही रवैया रहा, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे।
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