फरार सटोरिए सतीश सनपाल की वेब सीरीज पर विवाद, मानवाधिकार आयोग ने नेटफ्लिक्स को भेजा नोटिस
जबलपुर। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर प्रसारित की जा रही नई वेब सीरीज ‘देसी ब्लिंग’ (Desi Bling) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जबलपुर के कई थानों में दर्ज आपराधिक मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे कथित अरबपति सटोरिए और बिजनेसमैन सतीश सनपाल पर आधारित इस सीरीज को लेकर अब कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी किया है।
अपराध को 'ग्लैमराइज' करने का आरोप
सोशल मीडिया और ओटीटी पर इस सीरीज के आने के बाद से ही इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया था। आरोप है कि वेब सीरीज में सतीश सनपाल की छवि को बेहद आकर्षक, आलीशान और 'ग्लैमराइज' (Glamorize) करके दिखाया गया है। आलोचकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ऐसा व्यक्ति, जो पुलिस रिकॉर्ड में एक शातिर और फरार अपराधी है, उसे इस तरह पर्दे पर एक रईस और सफल बिजनेसमैन के रूप में पेश करना समाज में अपराध का महिमामंडन (Glorification of Crime) करने जैसा है।
यह है पूरा मामला
मूल रूप से जबलपुर से ताल्लुक रखने वाले सतीश सनपाल पर सट्टेबाजी, वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह जबलपुर पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहा है। नेटफ्लिक्स की सीरीज 'देसी ब्लिंग' में सतीश सनपाल और उनके परिवार की दुबई की बेहद आलीशान जिंदगी, करोड़ों की गाड़ियां और अथाह संपत्ति को दिखाया गया है, जिस पर अब गंभीर आपत्ति जताई जा रही है।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस बात का संज्ञान लिया है कि क्या एक फरार आरोपी को इस तरह वैश्विक मंच पर प्रमोट करना कानून व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है। आयोग ने नेटफ्लिक्स से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। इस नोटिस के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और शो के निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत में इस शो को लेकर लगातार आक्रोश और कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
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