दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत खारिज, कोर्ट ने क्षेत्राधिकार का दिया हवाला
नई दिल्ली: साकेत जिला अदालत ने गुरुवार को दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत को विचारणीय न मानते हुए खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। याचिका खारिज करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत ने कहा कि उसके पास भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) भानु प्रताप सिंह ने संजीव सैनी की ओर से दायर उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें सोमनाथ भारती और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। न्यायाधीश भानु प्रताप सिंह ने अपने आदेश में कहा, “यह अदालत इस बात को लेकर स्पष्ट है कि वर्तमान आवेदन इस अदालत के समक्ष विचारणीय नहीं है, क्योंकि इस अदालत के पास भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत शिकायतों पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। तदनुसार, यह आवेदन खारिज किया जाता है।”
बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत दायर हुई थी याचिका
यह आवेदन शिकायतकर्ता संजीव सैनी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत दायर किया था। अदालत ने आवेदन का अवलोकन करने के बाद कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। अदालत के अनुसार, शिकायतकर्ता के वकील यह स्पष्ट करने में असमर्थ रहे कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग वाला आवेदन इस अदालत के समक्ष किस आधार पर विचारणीय है। शिकायतकर्ता संजीव सैनी की ओर से अधिवक्ता शिशंत और समीर खान पेश हुए।
सोमनाथ भारती समेत 14 लोगों पर लगाए गए थे आरोप
सोमनाथ भारती, मालवीय नगर के थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित कुल 14 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जानकारी देने और शिकायत करने के बावजूद अन्य आरोपियों ने पूर्व विधायक और मालवीय नगर के एसएचओ की मदद से झोड़ (तालाब) की संपत्ति पर पक्की सड़क का निर्माण कराया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पक्की सड़क का निर्माण पूर्व विधायक के निर्देशों और एसएचओ के संरक्षण में किया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि पूर्व विधायक और मालवीय नगर के एसएचओ ने अन्य आरोपियों से रिश्वत ली थी, क्योंकि उनके उन आरोपियों से संबंध थे। हालांकि, अदालत ने शिकायत को आरोपों के सही या गलत होने के आधार पर नहीं, बल्कि अपने अधिकार क्षेत्र और आवेदन की विचारणीयता के आधार पर खारिज किया।
(ANI)
ये भी पढ़ें: लद्दाख में केंद्र से रुकी बातचीत पर चिंता, 8 जिलों में पंचायत व हिल काउंसिल चुनाव कराने की मांग