Madhya Pradesh : रायसेन। सड़क दुर्घटना में दो साल

कोर्ट ने माना - स्किल कर्मचारी...मृत बच्चे की आमदनी 11885 रुपये प्रति माह

कोर्ट ने माना - स्किल कर्मचारी...मृत बच्चे की आमदनी 11885 रुपये प्रति माह

Madhya Pradesh : रायसेन। सड़क दुर्घटना में दो साल पहले एक 6 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। इसी मामले में मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल, भोपाल ने फैसला सुना है। कहा, पीड़ित के परिवार को 19.80 लाख रुपये की मुआवजा राशि दें। कोर्ट ने बच्चे को स्किल कर्मचारी माना और उसकी आमदनी 11885 रुपये प्रतिमाह मानकर उसमें भविष्य की आमदनी की गणना की।

कोर्ट ने नेशनल इंश्योरेश कंपनी को आदेश दिया कि वह उसके परिवार को 19. 80 लाख रुपये की राशि का भुगतान करे। विशेष है कि बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत में एमएसीटी में इतनी बड़ी क्लेम राशि देने का यह प्रदेश में पहला मामला है। यह मामला बाल श्रम का नहीं है। यह मामला रायसेन के खंडेल गांव का है।

यहां दमोह का रहने वाला आसिम (12) महेश (8) और हरिराम (6) के साथ मजदूरी करने आए थे। 22 अगस्त 2023 को हरिराम अपने माता-पिता के साथ खाना खाने सड़क किनारे जा रहा था। तभी भोपाल-सागर रोड पर तेज रफ्तार में आ रही कार ने हरिराम को जोरदार टक्कर मारी। इस हादसे में वह गंभीर रुप से घायल हो गया। उसे रायसेन के अस्पताल में ले जाया गया, पर उसकी मौत हो गई।

मामले में उसके परिवार ने 28 अगस्त 2023 को एमएसीटी में कार मालिक हेमंत कुलकर्णी ( सफायर बायोटेक प्र. लि. भोपाल) का ड्राइवर सपना पति रमाकांत पटेल से 11.73 लाख रुपये की क्लेम राशि दिलाने की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने न्याय दृष्टांत नगजी भाई जजमेंट को आधार माना।

तीन प्रकार की श्रेणी -

ऐसे बच्चे को जो 1 से 15 वर्ष तक के होते हैं, उन्हें स्किल्ड वर्कर माना जाता है। कोर्ट ने हरिराम की कम से कम आमदनी 11881 रुपये प्रति महीना माना। इसमें 40 फीसदी उसकी भविष्य आमदनी और जोड़ी। इस तरह उसकी आमदनी 17 हजार रुपये प्रति माह माना। साथ ही कुल गुणांक के साथ इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह हरिराम के परिवार को 19.80 लाख रुपये अदा करे। 

मालूम हो कि मप्र में बच्चों के इस तरह की मौत में एमसीएटी द्वारा पारित आदेशों में अधिकतम 5 से 7 लाख रुपये तक का क्लेम मिला है, लेकिन यह प्रदेश का पहला मामला है, जिसमें छह साल के बच्चे की मौत में इतना अधिक राशि का अवॉड पारित किया गया। 

मामले में वकील अरूण तिवारी ने बताया कि यह बाल श्रम का मामला नहीं है। तीन प्रकार की श्रेणी होती है। कुशल, अकुशल और अर्ध कुशल। इस मामले में हरिराम 6 साल का था और पूरी तरह स्वस्थ्य था। वह बालिग होने के बाद बिना पढ़ाई-लिखाई किये के छोटे मोटे टेक्निकल काम से लेकर इंजीनियरिंग कर सकता था। इसी वजह से कोर्ट ने उसे स्किल वर्कर माना। इस मामले में भी कोर्ट ने नागजी भाई जजमेंट को आधार माना और 11.80 साथ रुपये देने का आदेश दिया। यह एमएसीटी के आदेशों में सबसे अधिक की राशि क्लेम है। 

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