हर्ष फायरिंग मामले में बिहार के MLA राजू कुमार सिंह की सजा पर फैसला सुरक्षित, विधानसभा सदस्यता पर मंडराया संकट
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने साल 2018 के आखिरी दिन एक न्यू ईयर पार्टी में हुई हर्ष फायरिंग और महिला डॉक्टर की मौत के मामले में बिहार के विधायक राजू कुमार सिंह की सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट इस मामले में शनिवार, 4 जुलाई को अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।
अभियोजन पक्ष ने कानून के रखवाले पर उठाए गंभीर सवाल
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने दोषी विधायक और अभियोजन पक्ष दोनों की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद यह निर्णय सुरक्षित रखा। इस दौरान कोर्ट ने राजू कुमार सिंह के आचरण को लेकर प्रोबेशन अधिकारी द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट पर भी गहन विचार-विमर्श किया। अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने विधायक की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है जहां एक 'लॉ मेकर' (कानून बनाने वाला) ही 'लॉ ब्रेकर' (कानून तोड़ने वाला) बन गया। वह 6 बार के विधायक हैं और कानून को अच्छी तरह समझते हैं, ऐसे में उन्हें प्रोबेशन पर छोड़ना समाज में बेहद गलत संदेश जाएगा।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि हर्ष फायरिंग हमारे देश में एक बीमारी बन चुकी है, जो इंसान की सामंती मानसिकता को दर्शाती है। घटना के वक्त राजू कुमार सिंह बिहार में नहीं बल्कि दिल्ली में थे, जहां उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा नहीं था, इसके बावजूद वे अपने साथ हथियार लेकर घूम रहे थे।
पति और बेटी के सामने हुआ था हादसा
सरकारी वकील ने अदालत को उस घटना की याद दिलाते हुए कहा कि मृतका डॉ. अर्चना गुप्ता की उम्र महज 45 वर्ष थी और उनकी पूरी जिंदगी आगे बाकी थी। यह दर्दनाक हादसा उनके पति और उनकी 12 साल की मासूम बेटी के सामने हुआ, जिसने अपनी मां के सिर से खून बहते देखा। बच्ची आज भी इस गहरे सदमे से गुजर रही है।
अभियोजन पक्ष ने विधायक पर सबूत मिटाने और भागने के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद मृतका के कपड़े और मोबाइल छुपा दिए गए थे, जिन्हें बाद में बरामद किया गया। वारदात के बाद आरोपी कुशीनगर हाईवे की तरफ भाग गया था, जहां से उसे पकड़ा गया। हाईवे पर कपड़े फेंके गए और घटना वाली जगह से खून को धोकर साफ किया गया, जिसकी पुष्टि वहां मौजूद डीजे (DJ) कर्मियों ने अपने बयानों में की है।
सरकारी वकील ने विधायक की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी को कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है। उसने कानून के दायरे से बाहर निकलने की हर मुमकिन कोशिश की। घटना के बाद न तो विधायक और न ही उनकी पत्नी ने कभी पीड़िता या उनके परिवार से मुलाकात की, जो उनकी अमानवीयता को साफ दर्शाता है।
बचाव पक्ष की दलील
राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया जा चुका है। अदालत में विधायक के बचाव में वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव, अधिवक्ता राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान पेश हुए। बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट से राजू कुमार सिंह को अच्छे आचरण के आधार पर प्रोबेशन (परिवीक्षा) पर रिहा करने की गुहार लगाई।
बचाव पक्ष के वकीलों ने एक अनोखा वैज्ञानिक तर्क देते हुए कहा कि दोषी विधायक फायरिंग करने में इतने वैज्ञानिक रूप से कुशल नहीं थे और उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं था कि गोली चलने के बाद किस दिशा में जाएगी। उन्होंने कोर्ट को भौतिकी (Physics) का सिद्धांत समझाते हुए कहा कि गोली हमेशा एक 'पैराबोलिक पाथ' (परवलयाकार मार्ग) पर चलती है।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अगर गोली 45 डिग्री के कोण पर चलाई जाए तो वह बहुत दूर जाती है और अगर 90 डिग्री पर चलाई जाए तो वह कम दूरी तय करती है। विधायक को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि गोली किस तरह का व्यवहार करेगी। यह घटना महज एक हादसा और लापरवाही का नतीजा थी, क्योंकि उनका अपना परिवार भी उसी डांस फ्लोर पर मौजूद था।
विधायकी बचाने की गुहार: '2 साल से ज्यादा सजा हुई तो छिन जाएगी सीट'
वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि राजू कुमार सिंह को पटना हाईकोर्ट से एक मामले में जमानत मिली हुई है, जबकि एक अन्य मामले में वे बरी हो चुके हैं। केवल तीसरा मामला ही कोर्ट के सामने लंबित है। विधायक की पत्नी रेनू सिंह ने भी प्रोबेशन अधिकारी को दिए बयान में कहा था कि उनके पति को कभी किसी मामले में जेल नहीं भेजा गया है, जिससे साबित होता है कि उनका कोई पुराना दोषसिद्धि का रिकॉर्ड नहीं है। वकीलों ने कहा कि हवा में दो गोलियां चलाई गई थीं, जो किसी को निशाना बनाकर नहीं दागी गई थीं।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोषी ने किसी गवाह को प्रभावित नहीं किया, न ही डराया-धमकाया या खरीदा है। वह 6 बार के विधायक हैं और साफ दिल से अपने क्षेत्र की जनता की सेवा कर रहे हैं। उनके बूढ़े माता-पिता और परिवार है। अगर उन्हें 2 साल से अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो वे अपनी विधानसभा सदस्यता खो देंगे। इसलिए उनके पिछले अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें सुधार का एक मौका मिलना चाहिए और 2 साल से कम की सजा दी जानी चाहिए।
खुद विधायक ने कोर्ट से क्या कहा?
जब अदालत ने राजू कुमार सिंह से पूछा कि क्या वे अपनी सफाई में कुछ कहना चाहते हैं, तो उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मैंने आज तक कभी ऐसा कोई गलत काम नहीं किया है। मैं एक सामाजिक व्यक्ति हूं और समाज के बीच रहता हूं। मृतका मेरे भाई के दोस्त की पत्नी थीं, जिन्हें मैं 'भाभी' कहकर बुलाता था। मैं अदालत से प्रार्थना करता हूं कि मेरे प्रति नरम रुख अपनाया जाए और न्यूनतम संभव सजा दी जाए।" (यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)
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