गृह मंत्रालय (MHA) ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर

फेसबुक-इंस्टाग्राम पर फर्जी सरकारी योजनाओं के नाम पर साइबर ठगी, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

Cyber Fraud Using Fake Govt Schemes, MHA Issues Advisory

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय (MHA) ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के विज्ञापनों के जरिए होने वाली साइबर ठगी को लेकर लोगों को आगाह किया है। ठग प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और मुख्यमंत्रियों समेत प्रमुख हस्तियों के छेड़छाड़ किए गए वीडियो और डीपफेक का इस्तेमाल कर लोगों को वित्तीय सहायता का लालच दे रहे हैं। गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने सोमवार को जारी एडवाइजरी में बताया कि ठग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और रजिस्ट्रेशन चार्ज जैसे बहानों से लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं।

डीपफेक वीडियो से लोगों को बनाया जा रहा निशाना

एडवाइजरी के मुताबिक, ठग मुख्य रूप से मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चला रहे हैं, जिनमें छेड़छाड़ किए गए वीडियो के जरिए सार्वजनिक हस्तियों को फर्जी सरकारी योजनाओं की घोषणा करते हुए दिखाया जाता है। इन विज्ञापनों में जरूरतमंद लोगों को वित्तीय सहायता देने का झूठा दावा किया जाता है। कुछ विज्ञापनों में फोन नंबर दिए जाते हैं, जबकि अन्य के जरिए लोगों को कथित लाभ या पुरस्कार पाने के लिए फर्जी वेबसाइटों पर भेजा जाता है।

टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ठगी

गृह मंत्रालय ने बताया कि ठग फोन कॉल, व्हाट्सएप चैट और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को बताया जाता है कि उन्हें वित्तीय सहायता या पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसके बाद राशि जारी करने से पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज, वेरिफिकेशन फीस या अन्य प्रशासनिक खर्चों के नाम पर बार-बार भुगतान मांगा जाता है। एडवाइजरी में कहा गया है कि कुछ मामलों में लोगों को फर्जी कैशबैक, स्क्रैच-कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं का लालच देकर भी निशाना बनाया जाता है।

+92 नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर चेतावनी

एडवाइजरी में अंतरराष्ट्रीय नंबरों, विशेष रूप से पाकिस्तान के देश कोड +92 से शुरू होने वाले नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ऐसे कॉल करने वाले खुद को किसी सार्वजनिक हस्ती या उनके कार्यालय का प्रतिनिधि बताकर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, ठग लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उन्हें सरकारी वित्तीय सहायता के लिए चुना गया है और इसके बाद अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगते हैं।

UPI पिन डालते ही खाते से कट सकते हैं पैसे

एडवाइजरी में बताया गया है कि कुछ मामलों में पीड़ितों को भुगतान एप्लिकेशन पर भेजकर पुरस्कार राशि प्राप्त करने के बहाने अपना ट्रांजैक्शन पिन दर्ज करने के लिए कहा जाता है। इससे पैसे मिलने के बजाय पीड़ित के खाते से ठग के खाते में भुगतान हो सकता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि *UPI पिन का इस्तेमाल भुगतान को अधिकृत करने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।* इसलिए किसी भी UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले लेनदेन की जानकारी ध्यान से जांचनी चाहिए।

सरकारी योजनाओं की आधिकारिक वेबसाइट से करें पुष्टि

राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई ने लोगों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी सरकारी योजना के विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से उसकी पुष्टि करें। लोगों को सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्तियों की पहचान आधिकारिक माध्यमों से सत्यापित करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित कार्यालय में जाकर जानकारी लेने की सलाह भी दी गई है।

आधार, पैन, OTP और UPI पिन साझा न करें

गृह मंत्रालय ने लोगों को आधार और पैन विवरण, बैंक खाते की जानकारी, वन-टाइम पासवर्ड (OTP) और UPI पिन जैसी संवेदनशील जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने की चेतावनी दी है। सार्वजनिक हस्तियों के वीडियो और आवाज में किए गए दावों की भी विश्वसनीय स्रोतों से जांच करने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे फर्जी विज्ञापनों या साइबर ठगी का सामना करता है, तो उसे तुरंत इसकी शिकायत करनी चाहिए। इसके लिए साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया जा सकता है या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

(एएनआई)

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