कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के पीछे खतरना

कान्हा में खतरनाक वायरस, गिर में 34 शेरों की जान लेने वाला संक्रमण, 5 बाघों की मौत

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भोपाल/पन्ना। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के पीछे खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की पुष्टि हुई है। यह वही वायरस है जिसने साल 2018 में गुजरात के गिर नेशनल पार्क में 34 शेरों की जान ले ली थी। अब यही संक्रमण कान्हा में भी सामने आया है, जिससे अब तक 5 बाघों की मौत हो चुकी है।

कुत्तों सें जंगली जानवरों में फैलते हैं

जांच में सामने आया कि यह वायरस आमतौर पर कुत्तों से जंगली जानवरों में फैलता है। इस खतरे को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के 8 गांवों में कुत्तों का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है।

जांच में वायरस की पुष्टि

रिपोर्ट के मुताबिक, कान्हा के सरही फॉरेस्ट रेंज में बाघिन टी-141 और उसके 4 शावकों की मौत के मामले में जांच के बाद इस वायरस की पुष्टि हुई। मृत बाघिन की उम्र लगभग 8 साल और शावकों की उम्र करीब 11 महीने बताई गई है।

एक और बाघ की मौत

पेंच टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में भी 2 वर्षीय बाघ की मौत हुई है। उसे 26 अप्रैल को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था, लेकिन 9 दिन बाद उसकी मौत हो गई। 2026 में प्रदेश में अब तक 32 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 25 मौतें प्राकृतिक कारणों से और 7 शिकार के मामलों से जुड़ी बताई गई हैं।

जल क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद किया गया

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्र के जल स्रोतों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और आवाजाही पर रोक लगाई गई है। साथ ही, निगरानी बढ़ाने के लिए कैमरे लगाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह वायरस वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

पन्ना में ट्रैक्यूलाइज किया, 9 दिन बाद मौत

पन्ना टाइगर रोजर्व के अमानगंज बफर जोन में 3 वर्ष के बाघ की मौत का खुलासा हुआ है। शव मंगववार सुबह मिला। बाध को 26 अप्रैल को ग्राम तारा के पास ट्रैक्यूलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। रेडियो कॉलर पहनाकर उसे जंगल में छोड़ दिया गया था।

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