जंगली कुत्तों के हमले में फंसे हिरण की बची जान, ग्रामीणों और वन विभाग ने पेश की मिसाल
उमरिया {मध्य प्रदेश}: जिले के चंदिया क्षेत्र में मानव संवेदनशीलता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। बरम बाबा के समीप जंगली कुत्तों के झुंड के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एक हिरण की जान ग्रामीणों की सतर्कता और वन अमले के समय पर किए गए रेस्क्यू अभियान से बच गई। घायल हिरण का उपचार वन विभाग की निगरानी में किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा।
जंगल से निकलते ही कुत्तों ने किया हमला
जानकारी के अनुसार, चंदिया क्षेत्र के बरम बाबा के पास एक हिरण जंगल से निकलकर खुले क्षेत्र की ओर आ गया था। इसी दौरान जंगली कुत्तों के एक झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्ते हिरण को चारों ओर से घेरकर उसका शिकार करने का प्रयास कर रहे थे। हमले में हिरण घायल हो गया और अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगा।
ग्रामीणों की सतर्कता से बची जान
इसी बीच वहां से गुजर रहे कुछ ग्रामीणों की नजर घायल हिरण पर पड़ी। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए हिरण को बचाने का प्रयास किया। ग्रामीणों की मौजूदगी से जंगली कुत्ते वहां से दूर हट गए, जिसके बाद हिरण को तत्काल सुरक्षित स्थान पर रखा गया। इसके साथ ही वन विभाग को घटना की सूचना दी गई।
वन विभाग ने किया त्वरित रेस्क्यू
सूचना मिलते ही एसडीओ कुलदीप त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित वन अमले को तत्काल मौके पर रवाना किया। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर घायल हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे चंदिया रेंज कार्यालय लाया गया। यहां वन कर्मचारियों की निगरानी में उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया।
इलाज के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हिरण के शरीर पर हमले के कारण चोटें आई हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो। विभाग का कहना है कि जैसे ही हिरण पूरी तरह स्वस्थ होगा और सामान्य रूप से चलने-फिरने की स्थिति में आ जाएगा, उसे पुनः जंगल में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
वन विभाग ने लोगों से की अपील
वन अधिकारियों ने ग्रामीणों की सतर्कता और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय पर सूचना नहीं मिलती तो हिरण की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी भी वन्यजीव के घायल होने, भटकने या संकट में होने की जानकारी मिले तो स्वयं उसे पकड़ने या उपचार करने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू और उपचार की कार्रवाई कर सके।
वन्यजीव संरक्षण में समाज की भूमिका अहम
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों की सजगता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से एक बेजुबान वन्यजीव की जान बच सकी, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण है।
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