रक्षा संपदा विभाग ने शुरू किया सीमांकन, खाली करनी होगी 250 बीघे जमीन
रायबरेली,(उत्तर प्रदेश)। रायबरेली के सदर तहसील के इकलछनिया में इस बार मानसून की फुहारों के बीच 'धान की खनक' नहीं, बल्कि 'प्रशासन की धमक' सुनाई देगी। इकलछनिया स्थित हवाई पट्टी की करीब 250 बीघे सरकारी भूमि पर इस बार किसान धान की रोपाई नहीं कर पाएंगे। प्रशासन ने साफ शब्दों में 'नो एंट्री' का बोर्ड लगा दिया है। बुधवार को जब रक्षा संपदा कार्यालय की टीम ने सराय मोहम्मद शरीफ गांव में फीता डालकर जमीन की नापजोख शुरू की, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
बरसों से खेती कर रहे किसान
हवाई पट्टी की जमीन पर बरसों से हल चला रहे किसानों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है। धान की रोपाई का सीजन सिर पर है, और ऐन वक्त पर आए इस आदेश ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह इसी खेती पर टिकी है। अब जब जमीन खाली करने और पेड़ों की कटान पर रोक लगा दी गई है, तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
करीब 500 बीघे का है साम्राज्य, आधे पर चल रही थी 'खेती'
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, हवाई पट्टी के पास कुल करीब 500 बीघे भूमि दर्ज है. इसमें से लगभग 250 बीघे भूमि पर धड़ल्ले से खेती की जा रही है। इतना ही नहीं, कुछ रसूखदारों और ग्रामीणों ने तो इस सरकारी जमीन पर पक्के मकान तक खड़े कर लिए हैं। हवाई पट्टी के आसपास इकलछनिया, कंचौदा, सराय मोहम्मद शरीफ, नवाबगंज, सान्दू कुआं, भांव, जमालपुर नानकारी और बेनी कोपा जैसे कई गांवों की सीमाएं लगती हैं, जहां यह पूरा खेल चल रहा था।
हवाई पट्टी के नाम दर्ज भूमि का विस्तृत सर्वे और सीमांकन तेज
रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ के उप मंडलीय अधिकारी राम वर्मा ने बताया कि हवाई पट्टी के नाम दर्ज भूमि का विस्तृत सर्वे और सीमांकन तेजी से किया जा रहा है। सराय मोहम्मद शरीफ गांव में पैमाइश पूरी कर ली गई है। किसानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, कि वे इस भूमि पर धान की रोपाई कतई न करें और न ही पेड़ों को काटें। अवैध कब्जाधारकों को भूमि खाली करनी होगी. सर्वे का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
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