दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पात्र उम्मीदवार न हों तो DNB की आरक्षित सीटें हों अनारक्षित
नई दिल्ली [भारत]: दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि यदि किसी विशेष विशेषज्ञता में आरक्षित श्रेणी का कोई भी उम्मीदवार अर्हता प्राप्त नहीं करता है, तो राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) को संबंधित राज्य सरकार से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने के बाद काउंसलिंग से पहले ऐसी सीटों को अनारक्षित करना चाहिए ताकि वे रिक्त रहने के बजाय खुली श्रेणी के उम्मीदवारों से भरी जा सकें। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक बार सीट मैट्रिक्स प्रकाशित हो जाने और उम्मीदवारों द्वारा अपनी वरीयताएँ व्यक्त कर दिए जाने के बाद, न्यायालयों को प्रवेश प्रक्रिया के बीच में सीटों को अनारक्षित करने का निर्देश नहीं देना चाहिए।
एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द
विभाजित फैसले से उत्पन्न एक संदर्भ का उत्तर देते हुए, न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने एनबीईएमएस द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया और एकल न्यायाधीश के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसमें पंचकुला के सेक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल की ओबीसी रेडियोडायग्नोसिस सीट को 2025 डीएनबी (पोस्ट डिप्लोमा) प्रवेश प्रक्रिया के लिए अनारक्षित करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि उम्मीदवार द्वारा दायर रिट याचिका खारिज किए जाने योग्य है।
काउंसलिंग के बाद बदलाव से होगा नुकसान
न्यायालय ने कहा कि यद्यपि रिक्त शैक्षणिक सीट राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी प्रतीत हो सकती है, लेकिन योग्य उम्मीदवारों की अनुपस्थिति, काउंसलिंग में अनुपस्थित रहने या अपात्र पाए जाने जैसी कई व्यावहारिक वजहों से सीटें खाली रह सकती हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि काउंसलिंग के बाद सीटों को अनारक्षित करने से अधिक मेधावी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है, क्योंकि वे यह मानकर उस सीट का विकल्प नहीं चुनते कि वह उनके लिए उपलब्ध नहीं है।
सीटें दूसरे कोर्स में स्थानांतरित करने की नीति का जिक्र
न्यायालय ने यह भी कहा कि एनबीईएमएस पहले ही नीति बना चुका है कि दो वर्षीय डीएनबी (पोस्ट डिप्लोमा) की रिक्त सीटों को तीन वर्षीय डीएनबी (पोस्ट एमबीबीएस) के पूल में स्थानांतरित किया जाएगा। ऐसे में सीटें स्थायी रूप से खाली नहीं रहेंगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परामर्श पुस्तिका केवल मार्गदर्शक दस्तावेज है, इसे वैधानिक दस्तावेज नहीं माना जा सकता।
भविष्य के लिए कोर्ट ने दिए निर्देश
न्यायालय ने एनबीईएमएस को निर्देश दिया कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी (ओबीसी, एससी, एसटी या दिव्यांगजन) में किसी विषय के लिए पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध न हों, तो राज्य सरकार की स्वीकृति लेकर काउंसलिंग से पहले ऐसी सीटों को अनारक्षित कर खुली श्रेणी के उम्मीदवारों से भरा जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए एनबीईएमएस समय रहते आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करे, ताकि सीटें खाली न रहें और योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके। हालांकि, सीट मैट्रिक्स घोषित होने और विकल्प भरने के बाद किसी भी न्यायालय द्वारा सीटों को अनारक्षित करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
(एएनआई)
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