दिल्ली उच्च न्यायालय में एक नई जनहित याचिका दायर क

दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका: विरोध प्रदर्शनों के लिए एकसमान एसओपी और सख्त नियमों की मांग

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नई दिल्ली । एक वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सार्वजनिक प्रदर्शनों से संबंधित मौजूदा नियमों के कड़ाई से पालन और एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की मांग की है, ताकि प्रदर्शनों से सड़कों पर जाम न लगे, यातायात बाधित न हो और राष्ट्रीय राजधानी में अदालतों और व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच प्रभावित न हो। जनहित याचिका (पीआईएल) में, वकील ऋषभ सक्सेना ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है कि प्रदर्शन कानून के अनुसार निर्धारित स्थानों पर ही आयोजित किए जाएं, साथ ही शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार और जनता के निर्बाध आवागमन के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश को लागू करने की मांग

याचिका में मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ और अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश को लागू करने की मांग की गई है, जिसमें प्रदर्शनों के आयोजन की शर्तें निर्धारित हैं। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में नामित वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों को शामिल करने के लिए मौजूदा नियमों की समीक्षा की भी मांग की है। उन्होंने तर्क दिया है कि जब तक स्पष्ट नियम और प्रभावी यातायात प्रबंधन व्यवस्था लागू नहीं की जाती, तब तक केवल जंतर-मंतर से प्रदर्शनों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने से चिंताओं का समाधान नहीं होगा। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता 12 अक्टूबर को डिफेंस कॉलोनी से बाराखंबा रोड स्थित सक्षम प्राधिकारी कार्यालय में व्यावसायिक कार्य के लिए यात्रा कर रहे थे, तभी मंडी हाउस गोलचक्कर के पास सड़क और केंद्रीय यातायात द्वीप पर उन्हें भीड़ का सामना करना पड़ा।

यातायात बाधित होने के कारण यात्रा में लगभग दो घंटे की देरी

उन्होंने दावा किया है कि यातायात बाधित होने के कारण उनकी यात्रा में लगभग दो घंटे की देरी हुई और वे शाम लगभग 4 बजे अपने गंतव्य पर पहुंचे। याचिका के साथ प्रस्तुत तस्वीरों में टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, मोटरसाइकिल और निजी कारों सहित कई वाहन भीड़ के पास धीमी गति से चल रहे या रुके हुए यातायात में फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि तस्वीरों में यातायात कर्मी, बैरिकेड, डायवर्जन संकेत और आपातकालीन गलियारा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि, याचिका में यह स्वीकार किया गया है कि केवल तस्वीरों से ही व्यवधान की अवधि, प्रभावित वाहनों की कुल संख्या या अन्य स्थानों पर यातायात व्यवस्था की पुष्टि नहीं की जा सकती है। याचिका में पिछले कुछ वर्षों में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और लंबे समय तक चले धरने का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शन मध्य दिल्ली में यातायात की आवाजाही और व्यावसायिक क्षेत्रों, सार्वजनिक संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंच को प्रभावित कर सकते हैं।

रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थल के रूप में नामित

इसमें 2023 में पहलवानों के विरोध प्रदर्शन और रोजगार और परीक्षा संबंधी मुद्दों पर धरने सहित विभिन्न आंदोलनों का जिक्र किया गया है, और आरोप लगाया गया है कि लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों और यातायात में बदलाव से यात्रियों, कार्यालय जाने वालों, व्यापारियों, मरीजों, आपातकालीन सेवाओं, ड्राइवरों और दिहाड़ी मजदूरों पर असर पड़ा है। याचिका में दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर, 2026 के उस आदेश का भी उल्लेख है, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में रद्द कर दिया गया था और रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थल के रूप में नामित किया गया था। याचिकाकर्ता ने स्थायी आदेश संख्या 10/2018 की समीक्षा और अद्यतन की मांग की है, जिसमें प्रतिभागियों की संख्या, अनुमत समय, अग्रिम आवेदन, संरचनाओं और मार्च पर प्रतिबंध और सड़कों और यातायात को अवरुद्ध करने पर रोक से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने नव नामित स्थलों के लिए स्पष्ट शर्तें भी मांगी हैं।

अन्य क्षेत्रों के आसपास की सड़कें अवरुद्ध

मांगी गई प्रमुख राहतों में यह सुनिश्चित करने के निर्देश शामिल हैं कि कोई भी प्रदर्शन, धरना या सार्वजनिक सभा मंडी हाउस, जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के अन्य क्षेत्रों के आसपास की सड़कों को अवरुद्ध न करे, जो नामित विरोध स्थलों से बाहर हैं। याचिका में मध्य दिल्ली में दिल्ली उच्च न्यायालय और अन्य न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और वैधानिक प्राधिकरणों तक निर्बाध पहुंच की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से विरोध प्रदर्शनों के संभावित यातायात प्रभाव के अग्रिम आकलन, यातायात कर्मियों की तैनाती, डायवर्जन योजनाओं, समय पर सार्वजनिक सलाह और आपातकालीन पहुंच को बनाए रखने के लिए एम्बुलेंस और अग्निशमन सेवाओं के साथ समन्वय को शामिल करते हुए एक समान मानक परिचालन (एसओपी) तैयार करने या उसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

यातायात प्रबंधन से संबंधित दिशा-निर्देशों पर एक स्थिति रिपोर्ट मांगी

याचिका में 1 जनवरी, 2022 से 11 अक्टूबर, 2026 के बीच जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के लिए दी गई अनुमतियों का विवरण, निर्धारित शर्तों के कथित उल्लंघन और अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है। अंतरिम राहत के रूप में, याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और विशेष पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) से 10 से 12 अक्टूबर, 2026 के बीच प्रदर्शनों, यातायात प्रबंधन व्यवस्थाओं और सभाओं और व्यवधानों के संबंध में जारी सलाहों से संबंधित दिशा-निर्देशों पर एक स्थिति रिपोर्ट मांगी है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती है, बल्कि सार्वजनिक सड़कों और आवश्यक सेवाओं के अनावश्यक अवरोध को रोकते हुए प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे के प्रभावी प्रवर्तन का आह्वान करती है।

हाल के प्रदर्शनों के कारण लगभग ₹2,000 करोड़ का व्यापारिक नुकसान

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शनों को विनियमित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि हाल के प्रदर्शनों के कारण लगभग ₹2,000 करोड़ का व्यापारिक नुकसान हुआ है और कनॉट प्लेस जैसे वाणिज्यिक केंद्रों तक पहुंच बाधित हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि एक याचिका एक अधिवक्ता द्वारा और दूसरी व्यापारियों के संघ द्वारा दायर की गई है, और दोनों में यह सुनिश्चित करने के उपाय मांगे गए हैं कि विरोध प्रदर्शनों से अदालतों और व्यावसायिक गतिविधियों में बाधा न आए।

कनॉट प्लेस जैसी जगहें पूरी तरह से बंद

“हाल के दिनों में इसकी वजह से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। हम मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं। यह इस तरह से होना चाहिए कि वकीलों और व्यापारियों के काम में कोई बाधा न आए। कनॉट प्लेस जैसी जगहें पूरी तरह से बंद हो गईं,” पुरी ने कहा। याचिकाओं में प्रदर्शनों को विनियमित करने के लिए एक तंत्र की मांग की गई है, जिसमें विरोध करने के अधिकार की रक्षा करना और जनता, व्यापारियों और वकीलों को होने वाली असुविधा को कम करना शामिल है।

अदालत में मंगलवार को मामले की सुनवाई करने पर सहमति

ये याचिकाएं राष्ट्रीय राजधानी में यातायात, व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच और संस्थानों के नियमित कामकाज पर विरोध मार्च और प्रदर्शनों के प्रभाव को लेकर चिंताओं के बीच आई हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों का आयोजन अनावश्यक रूप से सार्वजनिक आवागमन को बाधित किए बिना या व्यावसायिक गतिविधियों को ठप्प किए बिना किया जाए। अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई।

(इनपुट: ANI)

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