दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 साल से फरार 50

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, 12 साल से फरार ₹50 हजार का इनामी आरोपी तमिलनाडु से गिरफ्तार

Delhi Crime Branch arrests long-absconding forgery accused after more than 12 years

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 12 साल से फरार चल रहे 62 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था। उसे 4 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में स्थित एक पोल्ट्री फार्म से दबोचा गया। आरोपी महत्वपूर्ण राजनीतिक और सरकारी कार्यालयों के फर्जी लेटरहेड से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल जालसाजी के मामले में वांछित था।

पुलिस तफ्तीश और गिरफ्तारी की कार्रवाई

यह पूरा मामला साल 2007 में नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से शुरू हुआ था। हैदराबाद से आए 65 वर्षीय आगंतुक विजय कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि धर्मशाला में उनके कमरे की अलमारी का ताला तोड़कर सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी हो गया है। पुलिस ने मूल रूप से कर्नाटक के मंगलौर निवासी मनोहरण कंधसामी को गिरफ्तार किया था। हालांकि उससे चोरी का सामान बरामद नहीं हुआ, लेकिन उसके पास से कई मुद्रित और सादे लेटरहेड बरामद हुए, जो प्रतिष्ठित राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी प्राधिकरणों के प्रतीत होते थे।

चोरी की जांच में खुला जालसाजी का राज

जांच में ये दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और जाली पाए गए। इसके बाद साल 2008 में उसी पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 465 और 468 के तहत एक अलग मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चोरी और जालसाजी दोनों मामलों को आगे की गहन जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया था।

जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार

जालसाजी के मामले में कंधसामी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, और लगभग एक महीने बाद अदालत ने उसे जमानत दे दी थी। मुकदमे का सामना करने के बजाय उसने जानबूझकर अदालत में पेश होना बंद कर दिया और फरार हो गया। साल 2014 में नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी की अदालत ने उसे भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया था। जांचकर्ताओं के बार-बार प्रयासों के बावजूद वह सालों तक पकड़ से बाहर रहा। आखिरकार, उसकी गिरफ्तारी के लिए 50,000 रुपये के इनाम की घोषणा की गई।

तकनीक और सर्विलांस के जरिए पुलिस ने बिछाया जाल

क्राइम ब्रांच के सेंट्रल रेंज की एक विशेष टीम ने उसे ट्रैक करने के लिए काम किया। एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में गठित इस टीम में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह, कई सब-इंस्पेक्टर, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल शामिल थे। हेड कांस्टेबल नवीन ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा और संचार पैटर्न की सावधानीपूर्वक जांच करके अहम भूमिका निभाई। एक महीने से अधिक की निरंतर तकनीकी निगरानी और क्रॉस-चेक के बाद, टीम ने तमिलनाडु में आरोपी द्वारा सक्रिय रूप से उपयोग किए जा रहे एक मोबाइल नंबर की पहचान की।

तमिलनाडु में नई पहचान के साथ चला रहा था पोल्ट्री फार्म

इस सुराग के आधार पर अधिकारियों ने तमिलनाडु में लगातार जमीनी पूछताछ और निगरानी की। इसके बाद पुलिस ने तिरुचेंगोडे के बाहरी इलाके में स्थित एक पोल्ट्री फार्म से कंधसामी को 4 अगस्त 2026 को बिना किसी प्रतिरोध के गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान कंधसामी ने स्वीकार किया कि जमानत मिलने के बाद वह जेल भेजे जाने और सजा के डर से भूमिगत हो गया था। पकड़ से बचने के लिए उसने अपने पुराने साथियों से संपर्क तोड़ दिया, अपना निवास स्थान बदल लिया, तमिलनाडु चला गया और अपने परिवार के साथ एक नई जिंदगी शुरू की। उसने तिरुचेंगोडे में रहकर एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया, जो उसके परिवार की आय का मुख्य स्रोत बन गया और एक दशक से अधिक समय तक अधिकारियों से अपनी असली पहचान और अतीत को सावधानीपूर्वक छिपाए रखा।

पुलिस ने गिरफ्तारी को बताया अहम सफलता

कंधसामी की उम्र करीब 62 वर्ष है, वह अशिक्षित है, विवाहित है और दो बच्चों का पिता है। पुलिस ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि कई सालों बाद भी, फरार आरोपी का पता लगाया जा सकता है और उसे सजा दिलाई जा सकती है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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