Lucknow : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले त्रि

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन सम्पन्न, पंचायत के 644 वार्ड और जिला पंचायत के 15 वार्ड घटे

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन सम्पन्न, पंचायत के 644 वार्ड और जिला पंचायत के 15 वार्ड घटे

Lucknow : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। परिसीमन के बाद ग्रामीण राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव आया है। राज्य में नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की सीमाओं के विस्तार से 504 ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में समाहित हो गईं हैं। इस बदलाव का सीधा असर ग्रामीण विकास की सरकार चुनने वाले पंचायत वार्डों की संख्या पर पड़ा है और पंचायत के 644 वार्ड और जिला पंचायत के 15 वार्ड कम हो गए हैं। इस बदलाव के अब प्रदेश में 57,695 ग्राम पंचायतों में चुनाव होगा, जबकि पहले इनकी संख्या 58,189 थी। यह पूरा पुनर्गठन चुनावी तैयारियों का एक महत्वपूर्ण चरण है।

पंचायती राज विभाग द्वारा इस संबंध में जारी आंकड़ों के अनुसार इस परिसीमन के बाद 644 क्षेत्र पंचायत वार्ड और 15 जिला पंचायत वार्ड खत्म हो गए हैं। ऐसा शहरी क्षेत्रों के विस्तार के बाद इन वार्डों के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में शामिल होने कारण हुआ है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने की संभावना है। शहरी क्षेत्रों के विस्तार के चलते 644 क्षेत्र पंचायत वार्ड और 15 जिला पंचायत वार्ड खत्म हो गए हैं। इसके अलावा 501 ग्राम पंचायतें और करीब 1700 ग्राम पंचायत वार्ड भी कम हुए हैं।

नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषद और नगर निगम के सृजन व सीमा विस्तार के कारण प्रदेश के 42 जिले प्रभावित हुए हैं, इसलिए पंचायतीराज विभाग ने इन जिलों में आंशिक परिसीमन करवाया। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इन जिलों में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के वाडों का नए सिरे से सीमांकन का काम पूरा हो चुका है। प्रदेश स्तर पर इसका डाटा भी करीब-करीब तैयार कर लिया गया है।

2021 के पंचायत चुनाव में जहां क्षेत्र पंचायत वार्डों की संख्या 75844 थी, जो अब घटकर 75200 रह गई है। इसी तरह से जिला पंचायत वाढों की संख्या भी 3030 से 3015 पर आ गई है। वहीं, 58195 ग्राम पंचायतें भी अब घटकर 57694 रह गई हैं। कुल 512 ग्राम पंचायतें समाप्त हुई हैं, जबकि 11 नई ग्राम पंचायतों का गठन हुआ है।

मालूम हो कि ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के निर्वाचन का कार्यकाल अगले साल क्रमशः 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल-मई 2026 में होने के आसार हैं। 

पंचायतों के परिसीमन का सबसे ज्यादा असर प्रदेश में सबसे ज्यादा देवरिया, आजमगढ़ और प्रतापगढ़ में हुआ है। शहरी क्षेत्र के विस्तार के कारण देवरिया में 64, आजमगढ़ में 49 और प्रतापगढ़ में 46 ग्राम पंचायतें समाप्त की गई हैं। वहीं, अवध के जिलों में अयोध्या में 22, लखनऊ में 3, बलरामपुर और बाराबंकी में 7-7, रायबरेली में 8, सीतापुर में 11, गोंडा में 22 और अंबेडकरनगर में तीन ग्राम पंचायतें खत्म हुई हैं।

परिसीमन प्रक्रिया के कारण प्रभावित जिलों में अलीगढ़, अंबेडकरनगर, अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलरामपुर, बाराबंकी बरेली, बस्ती, बुलंदशहर, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, खीरी, कुशीनगर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़, रायबरेली, संतकबीरनगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव आदि शामिल हैं।

वार्डों की संख्या में आई इस कमी का सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों में सीटों के आरक्षण और उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ेगा। राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही वार्डों की अंतिम सूची के आधार पर आरक्षण की प्रक्रिया शुरू करेगा।  सीटों के आरक्षण की नई सूची जारी होने के बाद ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में चुनावी सरगर्मियां तेज होंगी और उम्मीदवार आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश करना शुरू करेंगे। चूंकि अगले साल मार्च में चुनाव प्रस्तावित है, इसलिए शासन और प्रशासन दोनों ही स्तरों पर तेजी से काम चल रहा है।

यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/major-changes-in-the-national-pension-system-and-unified-pension-scheme/95483