बिहार के औरंगाबाद जिले का नाम बदलकर 'बिहार विभूति

औरंगाबाद का नाम बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह के नाम पर रखने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र

Demand to rename Aurangabad after Dr. Anugrah Narayan Singh, letter sent to CM

बिहार (औरंगाबाद)। औरंगाबाद जिले का नाम बदलकर महान स्वतंत्रता सेनानी और 'बिहार विभूति' डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह के नाम पर रखने की पुरजोर मांग की गई है। इस संबंध में राज्य महोत्सव संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह की ओर से पत्रांक आर०एम०एस० 29/26 और दिनांक 04.11.2026 के माध्यम से लोक सेवक आवास, पटना को आधिकारिक पत्र भेजा गया है। पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि औरंगाबाद की जनता की यह बहुत पुरानी और लंबे समय से चली आ रही मांग है कि जिले का नामकरण बिहार विभूति के नाम पर किया जाए।

जिले का नाम बदलने के लिए रखे गए 7 प्रमुख तर्क

  1. डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह का जन्म 18 जून 1887 को पोईयां गांव में हुआ था, जो वर्तमान समय में औरंगाबाद जिले के अंतर्गत ही आता है।

  2. उनकी निःस्वार्थ जनसेवा और बलिदान को देखते हुए बिहार की महान जनता उन्हें आदर के साथ 'बिहार विभूति' के रूप में पुकारती है।

  3. वे महात्मा गांधी के बेहद निकट सहयोगियों में शामिल थे। उन्होंने चम्पारण सत्याग्रह 1917, नमक सत्याग्रह 1930 और भारत छोड़ो आंदोलन जैसी ऐतिहासिक घटनाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया था और कई बार जेल भी गए थे।

  4. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के साथ ही डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह को भी आधुनिक बिहार का मुख्य निर्माता माना जाता है।

  5. वे वर्ष 1937 में ब्रिटिश काल के दौरान उप-प्रधानमंत्री और 1946 से 1957 तक स्वतंत्र बिहार के प्रथम उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री के पद पर रहे। इसके अलावा उनके पास श्रम, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी रहे थे।

  6. वे संविधान सभा के सम्मानित सदस्य भी रहे थे, जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया था।

  7. उनके सुपुत्र सत्येन्द्र नारायण सिंह भी आगे चलकर बिहार के मुख्यमंत्री बने, तथा उनकी स्मृति में वर्ष 1958 में पटना में प्रसिद्ध 'ए.एन. सिन्हा संस्थान' की स्थापना की गई थी।

जनता का है गहरा लगाव, सच्ची श्रद्धांजलि देने की मांग

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि औरंगाबाद की पावन धरती पर ऐसे महान सपूत का जन्म होना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है, लेकिन अब तक जिले का आधिकारिक नाम उनके नाम पर न रखा जाना बेहद दुखद है। औरंगाबाद की आम जनता का अनुग्रह बाबू के साथ एक गहरा भावनात्मक लगाव है। पत्र के माध्यम से यह मांग की गई है कि जिले का नाम बदलकर या तो "बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह जिला" अथवा "बिहार विभूति अनुग्रह धाम, औरंगाबाद" कर दिया जाए। ऐसा करने से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी और आने वाली युवा पीढ़ी को भी उनसे प्रेरणा प्राप्त होगी।

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