सीईसी ज्ञानेश कुमार पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला, SIR और 13 करोड़ नाम हटने पर उठे बड़े सवाल
भोपाल: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभालने के बाद से निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के एक संगठन की तरह काम कर रहा है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित उस खबर पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें दावा किया गया है कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
दिग्विजय सिंह ने की तीखी आलोचना
खबर में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और प्रक्रियागत बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। दोनों आयुक्तों ने आयोग के कुछ कदमों को अनधिकृत और अवैध भी बताया था। दिग्विजय सिंह ने 'पीटीआई-वीडियो' से बातचीत में कहा, जब से ज्ञानेश कुमार सीईसी बने हैं, तब से निर्वाचन आयोग भाजपा के एक संगठन के रूप में काम कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब टी. एन. शेषन देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे और हर कोई उनकी कार्यशैली से परिचित था। उन्होंने कहा, "जब शेषन सीईसी थे, तब मैं मुख्यमंत्री था। हम लोग निर्वाचन आयोग से डरते थे। आज तो इस आदमी (ज्ञानेश कुमार) से कौन डरता है?"
दिग्विजय सिंह ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को दी खुली चुनौती
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह वर्तमान सीईसी पर खुले तौर पर भ्रष्ट होने का आरोप लगा रहे हैं और उन्हें चुनौती देते हैं कि अगर उनमें हिम्मत है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करें। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के संबंध में 24 राजनीतिक दलों के नेताओं के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन निर्वाचन आयोग को सौंपा था और आयोग से बातचीत की इच्छा जताई थी, लेकिन इन लोगों ने हमें एक्नॉलेजमेंट (प्राप्ति सूचना) तक तक नहीं दी।
अवैध नाम हटाने और घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरा
उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता पहचान पत्र बनना चाहिए और यह काम निर्वाचन आयोग को करना चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम अवैध तरीके से मतदाता सूची से हटाना उसका काम नहीं है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि नाम काटने के लिए सत्तारूढ़ दल अक्सर घुसपैठियों का हवाला देता है, लेकिन सरकार अब तक यह नहीं बता पाई है कि ये घुसपैठिए आए कहां से।
घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र को घेरा
कांग्रेस नेता ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, अरे, आपकी सरकार 12 साल से है। घुसपैठिए कहां से घुसे? ऊपर से टपके? अगर बांग्लादेश से आए तो पकड़ो, नेपाल से आए तो पकड़ो, पाकिस्तान से आए तो पकड़ो, श्रीलंका से आए तो पकड़ो, क्यों नहीं पकड़ते? उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग किसी भी लोकतंत्र का एक प्रमुख अंग होता है। उसका काम निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराना है। उन्होंने कहा, लेकिन आज के निर्वाचन आयोग पर कम से कम मुझे तो कतई भरोसा नहीं है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर गरमाई राजनीति
निर्वाचन आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा दो निर्वाचन आयुक्त होते हैं। ज्ञानेश कुमार मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। आयोग इस समय मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चला रहा है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के अनुसार संधू और जोशी की आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील तथा पूरी मतदाता सूची की निगरानी और सुरक्षा से था।
एसआईआर पर आंतरिक विवाद
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ कदमों को अनधिकृत और अवैध बताया था। आयोग ने हालांकि इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि एसआईआर सहित पिछले 10 महीनों में लिए गए उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक टिप्पणियों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए। भारतीय निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार से एसआईआर की शुरुआत की थी। 'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए हैं।
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