डिंडौरी की ‘पार्वती मैडम’ ने जीता दिल, बिना वेतन बच्चों को पढ़ा रही गांव की बहू
डिंडौरी (मध्य प्रदेश)। जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरनर्ई के भीतर टोला स्थित सेटेलाइट प्राथमिक शाला में शिक्षा के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां गांव की एक बहू पार्वती मरावी बिना किसी सरकारी पद, वेतन या जिम्मेदारी के आदेश के नौनिहालों की पढ़ाई में सहयोग कर रही हैं। बच्चों के प्रति उनका लगाव और शिक्षा के लिए समर्पण अब पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्कूल में एक शिक्षक और एक शिक्षिका पदस्थ
स्कूल में एक शिक्षक और एक शिक्षिका पदस्थ हैं। लेकिन किसी दिन शिक्षक या शिक्षिका के स्कूल पहुंचने में देरी हो जाए या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे विद्यालय नहीं पहुंच पाएं, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसकी जिम्मेदारी गांव की बहू पार्वती मरावी संभाल लेती हैं। स्कूल के ठीक बगल में रहने वाली पार्वती 12वीं तक पढ़ी हैं और उनका अपना बच्चा भी इसी विद्यालय में अध्ययनरत है।
अगर किसी दिन शिक्षक नहीं पहुंचे तो होगी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
पार्वती बताती हैं, कि वह अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर स्कूल आती थीं। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि अगर किसी दिन शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उन्होंने अपने बच्चे के साथ दूसरे बच्चों को भी पढ़ाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे बच्चों के साथ उनका जुड़ाव बढ़ता गया और अब स्कूल के नौनिहाल उन्हें प्यार से ‘पार्वती मैडम’ कहकर बुलाते हैं।
बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होना बेहद जरूरी
पार्वती का मानना है, कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि बच्चों की नींव मजबूत होगी, तो आगे की पढ़ाई में उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी सोच के साथ वह बच्चों को पढ़ने-लिखने के साथ उनकी बुनियादी समझ विकसित करने में मदद करती हैं।
पार्वती किसी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं
खास बात यह है, कि पार्वती बच्चों को पढ़ाने के लिए किसी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद शिक्षा के प्रति उनका यह जुनून उन्हें बच्चों के बीच एक अलग पहचान दिला रहा है। बच्चे भी पार्वती मैडम के पढ़ाने से खुश नजर आते हैं। उनका कहना है कि मैडम उन्हें अच्छी तरह पढ़ाती हैं और पढ़ाई समझने में मदद करती हैं।
पार्वती के प्रयास की ग्रामीण कर रहे सराहना
पार्वती के इस प्रयास की ग्रामीण भी सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है, कि आज के दौर में जहां लोग अपनी व्यस्त जिंदगी में दूसरों के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं गांव की यह बहू बच्चों के भविष्य के लिए अपना समय दे रही है।
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