प्रदर्शनकारी विस्थापितों का आरोप है कि भू-अर्जन अध

सिंगरौली में आर-पार के संघर्ष के लिए तैयार विस्थापित

धरना पर बैठे अमेलिया कोल माइंस के विस्थापित

सिंगरौली (मध्यप्रदेश)।  जिले के टीएचडीसी (THDC) अमिलिया कोल ब्लॉक परियोजना के खिलाफ विस्थापितों का आक्रोश फूट पड़ा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तेंदुहा पंचायत के सरपंच छोटे सिंह मरावी और विस्थापित नेता बृजेश तिवारी के नेतृत्व में सैकड़ों प्रभावित ग्रामीणों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया।  बरगवां तहसीलदार दीपेंद्र तिवारी को 30 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन द्वारा सात दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर ग्रामीणों ने फिलहाल अपना धरना स्थगित कर दिया है।

बार-बार की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप

प्रदर्शनकारी विस्थापितों का आरोप है कि भू-अर्जन अधिकारी, पुनर्वास समिति और परियोजना प्रबंधक को बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। उनकी पमाग है कि छूटे हुए परिवारों को तुरंत विस्थापन सूची में शामिल करना और 2017-18 के सर्वे में छूटे मकानों का मुआवजा भुगतान, 31 अगस्त 2019 से पहले के भू-स्वामियों को भू-विस्थापित मानते हुए उसी तिथि से भत्ता और पेंशन का भुगतान, पचौर कॉलोनी के जर्जर स्कूल की जांच, नई पंचायत का गठन, अस्पताल, पार्क, जिम और निशुल्क बिजली-पानी की व्यवस्था टीएचडीसी में स्थानीय विस्थापितों को रोजगार, कॉन्ट्रैक्ट में विस्थापित वेंडरों को प्राथमिकता और डीजीएमएस दर पर मजदूरी। 46 हेक्टेयर छोड़ी गई भूमि की 15 साल की क्षतिपूर्ति, रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण, पुलिस चौकी, पक्की सड़क, फसल क्षतिपूर्ति और कंचन नदी की सुरक्षा के लिए गैवियन डैम का निर्माण।

चेतावनीः एक हफ्ते में कुछ नहीं हुआ तो काम बंद करा देंगे

सरपंच छोटे सिंह मरावी और बृजेश तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर इन मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो ग्रामीण कंपनी का काम पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन चक्काजाम करने को मजबूर होंगे। ​वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए बरगवां तहसीलदार दीपेंद्र तिवारी ने कहा कि जमींदोज घरों के मुआवजे से वंचित विस्थापितों की सूची तैयार कर उन्हें शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शेष मांगों पर भी प्रबंधन के साथ चर्चा कर न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी।

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