‘जाति नहीं, ज्ञान पूछने वाला समाज चाहिए’, बौद्ध महासम्मेलन में बोले सीएम डीके शिवकुमार
चामराजनगर: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब समाज बुद्धिमत्ता, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित हो। उन्होंने जातिगत भेदभाव छोड़कर ज्ञान को प्राथमिकता देने की अपील की। चामराजनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासम्मेलन में उन्होंने बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना, गरीबों के लिए आवासीय भूखंड और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी कई अहम बातें कहीं। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासम्मेलन को संबोधित करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, "हमें ऐसे समाज की आवश्यकता नहीं है जो जाति पूछे। हमें ऐसे समाज की आवश्यकता है जो ज्ञान पूछे। बुद्ध ज्ञान के प्रतीक हैं; अंबेडकर सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। केवल तभी जब तीन रोशनी- बुद्ध, बसवा और अंबेडकर- चमकेंगी, तब भारत चमक सकता है।" उन्होंने आगे कहा, "मैं जाति में विश्वास नहीं रखता। मैं केवल सिद्धांतों में विश्वास करता हूं। बुद्ध गुरु ने कहा था कि सत्ता लोगों की सेवा के लिए होनी चाहिए, किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं। हमारी सरकार भी उसी रास्ते पर चल रही है। प्रजासेवा विभाग के माध्यम से सरकारी सेवाएं लोगों के घर-घर तक पहुंचाई जा रही हैं।"
विरोधियों पर साधा निशाना, नफरत की राजनीति छोड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए लोगों से विभाजनकारी विचारों और नफरत की राजनीति को खारिज करने की अपील की। उन्होंने कहा, "बुद्ध ने कहा था कि नफरत को दूर रखा जाना चाहिए। लेकिन कुछ लोग इस डीके शिवकुमार के प्रशासन को देखकर ईर्ष्या कर रहे हैं। जैसा कि हमारे सिद्धारमैया कहते हैं, झूठ कुछ लोगों का घरेलू सामान है। वे ईर्ष्या के कारण समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं इस बुद्ध और इस बुद्ध के वंशजों से प्रार्थना करता हूं। आपको ऐसे लोगों को अपने वोट के माध्यम से जवाब देना होगा। आपके पास इस राज्य में नफरत और ईर्ष्या की राजनीति करने वालों की राजनीति को समाप्त करने की शक्ति है।"
बेंगलुरु में बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना पर विचार
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक सरकार बौद्ध विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "बेंगलुरु में कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी और निर्णय लिया जाएगा।" शिवकुमार ने बताया कि मंत्री सतीश जारकीहोली के प्रस्ताव के अनुसार, अगला अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन बेंगलुरु दक्षिण जिले में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा बेलगावी में भी एक अन्य सम्मेलन आयोजित करने पर विचार किया जा सकता है। धार्मिक सद्भाव पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म किसी एक व्यक्ति या परिवार की संपत्ति नहीं है। उन्होंने सभी से अपने-अपने धर्म और परंपराओं का पालन करते हुए आपसी सम्मान के साथ रहने की अपील की। उन्होंने कहा, "धर्म किसी के घर की संपत्ति नहीं है। हिंदू धर्म भी किसी की संपत्ति नहीं है। धर्म अलग हो सकते हैं। लेकिन उनके मूल सिद्धांतों में, मानवता के मूल्य और भक्ति महत्वपूर्ण हैं। हर किसी को अपने धर्म और प्रथाओं का पालन करते हुए आपसी सम्मान के साथ रहना चाहिए।"
दो साल में 10 लाख से अधिक भूखंड देने का लक्ष्य
राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य गरीबों और वंचित लोगों के जीवन में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने उचित दस्तावेजों के साथ लोगों को घर, साइट, जमीन और खाता प्रदान करने के लिए 'भू गारंटी' दी है। पात्रों को अधिकार पत्र देने की प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। इस संबंध में, राजस्व विभाग की जिम्मेदारी डॉ. जी. परमेश्वर को दी गई है, जो क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहे हैं। अगले दो वर्षों में गरीबों को 10 लाख से अधिक साइट प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष पांच लाख साइट देने के लिए कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।"
पांच गारंटी योजनाओं का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार की पांच गारंटी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे लोगों को आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।
- * गृह ज्योति योजना: प्रति घर 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली।
- * गृह लक्ष्मी योजना: परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये।
- * शक्ति योजना: महिलाओं और छात्राओं के लिए मुफ्त बस यात्रा।
- * अन्न भाग्य योजना: पात्र लाभार्थियों को 10 किलोग्राम चावल।
- * युवा निधि योजना: पात्र युवाओं को आर्थिक सहायता।
किसानों की मुफ्त बिजली पर 30,000 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान
शिवकुमार ने किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली सुविधा का जिक्र करते हुए कहा कि इस साल किसानों के पंपसेट को बिजली उपलब्ध कराने पर सरकार की देयता लगभग 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि बारिश की कमी के कारण कृषि गतिविधियों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इन मुद्दों पर बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने भाजपा और जेडीएस को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि उन्होंने गरीबों के जीवन में मदद पहुंचाने वाली कौन-सी योजना लागू की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार 136 सीटें मिलने के बाद सत्ता में आई है और जनता के भरोसे पर खरा उतरना उसका कर्तव्य है।
आरक्षण को बताया सामाजिक न्याय का माध्यम
आरक्षण पर अपनी बात रखते हुए शिवकुमार ने कहा कि यह केवल अवसर नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए रास्ता बनाने की व्यवस्था है, जो अवसरों से दूर रहे हैं। उन्होंने कहा, "आरक्षण सिर्फ एक अवसर नहीं है। यह उन लोगों के लिए रास्ता बनाने की एक प्रणाली है जो अवसरों से दूर हैं। समाज की प्रगति केवल सामाजिक न्याय और समानता के माध्यम से संभव है। सरकार की आकांक्षा गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के जीवन में बदलाव लाना है। बुद्ध, बसवा और अंबेडकर के सिद्धांतों के आधार पर सरकारी कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि खेती के लिए संसाधनों की कमी का सामना कर रहे किसानों की मदद के लिए मुफ्त में जमीन जोतने की सुविधा देने वाली 'ने गिलायोगी' योजना शुरू की जा रही है।
‘सत्ता स्थायी नहीं, लोगों के जीवन में योगदान मायने रखता है’
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक सत्ता और पद स्थायी नहीं होते। महत्वपूर्ण यह है कि सत्ता में रहते हुए लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया गया। उन्होंने कहा, "आग लगाना आसान है। लेकिन घर बनाना मुश्किल है। घर बनाने से ज्यादा जरूरी है दिलों का जुड़ना। इंसान दीवारें खड़ी कर सकता है और लोगों को बांट सकता है। लेकिन हमारी कांग्रेस सरकार की सोच पुल बनाना और लोगों को एकजुट करना है। सत्ता और पद स्थायी नहीं हैं। मायने यह रखता है कि सत्ता में रहते हुए हमने लोगों के जीवन में क्या योगदान दिया है। किसी से बदला लेने के लिए सत्ता का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सरकार हमेशा लोगों की सेवा करने और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है।"
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