राज्य की योगी सरकार दुधवा नेशनल पार्क को पर्यटन का

यूपी के दुधवा नेशनल पार्क में बनेगा वेलनेस टूरिज्म हब

यूपी के दुधवा नेशनल पार्क में बनेगा वेलनेस टूरिज्म हब

पांच एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होगा

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद में भारत नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा नेशनल पार्क की जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए दुनिया में अलग पहचान है। राज्य की योगी सरकार दुधवा नेशनल पार्क को पर्यटन का प्रमुख डेस्टिनेशन बनाने के लिए ‘होलिस्टिक वेलनेस टूरिज्म’ का केन्द्र बनाने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना के अंतर्गत नेपाल सीमा से सटे चंदन चौकी गांव में करीब पांच एकड़ क्षेत्रफल में ‘होलिस्टिक वेलनेस टूरिज्म’ थीम पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक विशेष आवासीय पर्यटन इकाई विकसित की जाएगी। 

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल दुधवा को केवल वन्यजीव प्रेमियों का प्रमुख गंतव्य ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, प्रकृति और शांति की तलाश में आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक आदर्श अनुभव केंद्र बनाएगी। पर्यटन मंत्री ने बताया कि यहां पर्यटकों के लिए विभिन्न श्रेणी के लग्जरी कॉटेज बनाए जाएंगे। ये कॉटेज न केवल आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे बल्कि प्रकृति के बीच सुकूनभरा अनुभव भी देंगे। परिसर में पर्यटकों के विशिष्ट अनुभव लिए खेलकूद सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। आगंतुकों के लिए योग, ध्यान और वेलनेस की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इन सुविधाओं की बुकिंग उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और उप्र. ईको टूरिज्म विकास बोर्ड की वेबसाइट्स पर उपलब्ध होगी। 

पर्यटन मंत्री ने बताया कि इन सुविधाओं के संचालन और अनुरक्षण के लिये उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड एवं बीवीजी इंडिया लिमिटेड के बीच एग्रीमेंट हुआ है। इस अवसर पर महानिदेशक पर्यटन राजेश कुमार, अपर निदेशक ईको टूरिज्म विकास बोर्ड पुष्प कुमार के और कंपनी के चीफ ग्रोथ ऑफिसर जीतेंद्र वालिया मौजूद रहे। 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'दुधवा न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत का एक प्रमुख ईको डेस्टिनेशन है। यहां प्रस्तावित वेलनेस यूनिट घरेलू और विदेशी पर्यटकों को प्रकृति की गोद में लग्जरी और वेलनेस का अद्भुत अनुभव देगी। इस परियोजना से दुधवा क्षेत्र में पर्यटन नई ऊंचाइयों को छुएगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे। 

मालूम हो कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विशेष प्रयासों से दुधवा नेशनल पार्क को 1977 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था। इसके बाद 1984 में इसमें गैंडों के प्रजनन केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए एक सफल अभियान चलाया गया। बाद में इसे बाघ अभयारण्य भी घोषित किया गया। इस नेशनल पार्क में दुधवा के अलावा किशनपुर, कतर्नियाघाट भी संरक्षित क्षेत्र हैं। हिमालय की तलहटी में स्थित दुर्लभ जैव-विविधता वाले दुधवा में बाघ, गैंडा, हाथी, बारहसिंगा और हिरण समेत 400 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाये जाते हैं।

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