मंदसौर में श्री द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में

मंदसौर की धार्मिक विरासत में द्विमुखी गणपति मंदिर की अलग पहचान

सात फीट ऊंची प्रतिमा बनी आस्था का खास केंद्र

मध्यप्रदेश: मंदसौर की पहचान विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर से होती है, लेकिन इसी ऐतिहासिक नगरी में भगवान श्रीगणेश का एक ऐसा प्राचीन मंदिर भी है, जो अपनी अनूठी प्रतिमा और धार्मिक मान्यताओं के लिए विशेष पहचान रखता है। जनकूपुरा के गणपति चौक में स्थित श्री द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में भगवान गणेश एक ही प्रतिमा में दो अलग-अलग स्वरूपों में विराजमान हैं।

दो स्वरूपों में विराजे द्विमुखी गणपति

गणेशोत्सव के अवसर पर भगवान के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रतिमा की खासियत यह है कि एक ओर सेठजी स्वरूप तो दूसरी ओर पंचसुंडी स्वरूप के दर्शन होते हैं। मंदसौर की ऐतिहासिक नगरी दशपुर में भगवान श्रीगणेश के इस अनूठे मंदिर की अपनी अलग पहचान है। जनकूपुरा के गणपति चौक में स्थित श्री द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा लगभग सात फीट ऊंची बताई जाती है। 

एक ही प्रतिमा में सेठजी और पंचसुंडी गणपति के दो स्वरूप

इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि इसके आगे और पीछे दो अलग-अलग स्वरूप दिखाई देते हैं। प्रतिमा के एक ओर सेठजी स्वरूप के दर्शन होते हैं, जबकि दूसरी ओर पंचसुंडी स्वरूप दिखाई देता है। यही विशेषता इस मंदिर को अन्य गणेश मंदिरों से अलग बनाती है। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर भगवान श्रीगणेश के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। 

अनोखे गणपति स्वरूप से गहरी आस्था

भक्त भगवान के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और प्रतिमा का अनूठा स्वरूप श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा करते हैं। मंदसौर की पहचान केवल भगवान पशुपतिनाथ मंदिर तक सीमित नहीं है। शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में चिंतामणि गणेश मंदिर भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

दो स्वरूपों वाले गणपति बने आस्था का केंद्र

यहां विराजमान भगवान गणेश के दो स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं और मंदिर की विशिष्ट पहचान को कायम रखते हैं। गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश की आराधना और दर्शन का विशेष महत्व होता है। ऐसे में मंदसौर के इस मंदिर की धार्मिक परंपरा और अनूठी प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। 

ये भी पढ़ें- मझगांय बांध के डूब क्षेत्र में 'चिता आंदोलन' जारी, पात्र परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने का ग्रामीणों का आरोप