ट्विशा की मौत का मामला, इतिहास में पहली बार तीन अदालतों में एक साथ सुनवाई
भोपाल/नई दिल्ली। भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सोमवार को भोपाल से दिल्ली तक सुनवाई का दौर चला। भोपाल में जिला कोर्ट, जबलपुर में हाई कोर्ट और दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने इसी केस से जुड़े अलग-अलग मामलों की सुनवाई की।
यह देश के इतिहास में पहला मामला
देश के न्यायिक इतिहास में संभवतः ऐसा पहली बार है, जब एक ही व्यक्ति से जुड़े केस की अलग-अलग अदालतों में एक साथ सुनवाई की गई हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस में ऐसा नैरेटिव बनाया जा रहा है कि आरोपी पक्ष न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होने के कारण निष्पक्ष जांच या ट्रायल नहीं हो पाएगा। इसी 'पीड़ादायक धारणा' को खत्म करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत ने इसे स्वतः संज्ञान लिया।
मीडिया ट्रायल रोकें, सार्वजनिक बयानाजी से बचें
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भूइयां की बेंच ने कहा कि इस केस का मीडिया ट्रायल रोकें। दोनों परिवार सार्वजनिक बयानबाजी से बचें। जो कहना हो, जांच एजेंसी के सामने कहें। कोर्ट ने मीडिया संस्थानों से भी कहा कि वे संभावित गवाहों या आरोपियों के बयान रिकॉर्ड करने से बचें।
राज्य सरकार सीबीआई को सौंपेगी जांच
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने जा रही है। कोर्ट ने कहा- निष्पक्ष जांच के हित में यह बेहतर कदम है। देर रात सीबीआई दिल्ली ने दहेज हत्या और उत्पीड़न का केस दर्ज कर लिया। इसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, द्विशा के परिजनों के बयान को आधार बनाया गया है। जांच टीम जल्द ही भोपाल का दौरा करेगी।
मृतका के खिलाफ मीडिया में बयान दे रही हैं गिरिबाला सिंह
शीर्ष कोर्ट को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि गिरिबाला सिंह मीडिया में जाकर मृतका के खिलाफ बयान दे रही हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। वहीं, ट्विशा के परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने एफआईआर दर्ज करने में कथित देरी और शुरुआती जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह जांच के मेरिट पर कोई राय नहीं दे रहा है और जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से जांच पूरी करने दी जाएगी।
हाई कोर्ट की ओर से रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को जवाब देने मिला दो दिन का समय
जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने पर सुनवाई हुई। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने गिरिबाला को जवाब देने के लिए दो दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 मई को होगी। उधर, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल की जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकीलों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि गिरिबाला सिंह को नोटिस की तामीली नहीं हुई थी।
जिला कोर्ट में गिरिबाला और समर्थ की कॉल डिटेल पर पुलिस जवाब दाखिल नहीं कर पाई-
भोपाल में जिला कोर्ट में सोमवार को कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने से जुड़े आवेदन पर सुनवाई हुई। द्विशा पक्ष की ओर से गिरिबाला और समर्थ की 12 मई से 20 मई तक की कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। साथ ही एम्स (AIIMS) भोपाल के सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखने का आवेदन लगाया गया है। मामले में सोमवार को पुलिस को कोर्ट में जवाब पेश करना था, लेकिन पुलिस की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
इसे भी पढ़ेंः सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की संख्या बढ़ी, दिखे 315 गिद्ध