चुनाव आयोग ने 28 नवंबर को मुलाकात के लिए टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल को दिया समय
चुनाव आयोग ने 28 नवंबर को मुलाकात के लिए टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल को दिया समय
दिल्ली में आयोग के मुख्यालय में होगी मुलाकात
कोलकाता। चुनाव आयोग ने टीएमसी के प्रतिनिधि मंडल को 28 नवंबर को मुलाकात का समय दिया है। टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के लिए पत्र लिखा है। टीएमसी के प्रतिनिधि मंडल को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में मुलाकात करने को कहा गया है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग टीएमसी के केवल पांच सांसदों को मुलाकात करने के लिए कहा है। टीएमसी ने चुनाव आयोग को मुलाकात के लिए दस सांसदों के नाम की सूची दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग केवल पांच ही सांसदों से क्यों मुलाकात करना चाहता है, दस सांसदों से क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से अपने पांच सवालों का जवाब मांगेगा। टीएमसी के अनुसार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 24 नवंबर को टीएमसी के दस सांसदों को एसआइआर संबंधी मांगों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के मुलाकात करने की जिम्मेदारी सौंपी है। टीएमसी के सांसद सुदीप बनर्जी, सौगत राय, कल्याण बनर्जी, डेरेक ओब्रायन, शताब्दी राय, डोला सेन, महुआ मोइत्रा, प्रकाश चिक बड़ाइक, सजदा अहमद, ममता बाला ठाकुर और साकेत गोखले पर मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने 24 नवंबर को पार्टी के सांसदों, राज्य के मंत्रियों, विधायकों, पदाधिकारियों समेत 25 हजार जनप्रतिनिधियों से वरचुअल बैठक की थी। उसी बैठक में दस सांसदों को मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के समय मांगने और बैठक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। टीएमसी का एसआइआर संबंधी अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करने कार्यक्रम है और उसे कामयाब बनाने की कवायद तेज है। जानकारों के अनुसार चुनाव आयोग की ओर से पश्चिम बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होते ही टीएमसी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधना शुरू किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर पश्चिम बंगाल में एसआइआर को स्थगित करने की मांग की है। उसके बाद उन्होंने दूसरा पत्र लिख कर चुनाव आयोग से एसआइआर का काम ठीके पर गैरसरकारी लोगों से नहीं कराने और निजी कैपसों में बूथ नहीं रखने की मांग की है। वे चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ कोलकाता और बनगांव में महासभा और महारैली कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि वे एसआइआर की विरोधी नहीं है। उनका सवाल है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले एसआइआर जल्दबाजी में दो महीने में क्यों कराय जा रहा है जबकि पिछला एसआइआर 2002 में तीन साल में कराया गया था। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर वैध वोटरों के नाम हटाए जाने की साजिश हो रही है। चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर कार्या कर रहा है।