समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन, 1,170 करोड़ की संपत्ति कुर्क
नई दिल्ली। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बड़ा शिकंजा कसा है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बुधवार को यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कुर्क (अटैच) कर लिया है। कुर्क की गई संपत्तियों की पुस्तकीय (बुक) वैल्यू 426 करोड़ रुपये और अनुमानित मौजूदा बाजार मूल्य 1,170 करोड़ रुपये है।
ED के लखनऊ आंचलिक कार्यालय ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह कार्रवाई की है। यह यूनिवर्सिटी रामपुर जिले के सिंघनखेड़ा गांव के जौहर नगर में स्थित है, जिसका संचालन आजम खान द्वारा नियंत्रित ट्रस्ट के जरिए किया जाता है। वह इस यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं।
26 FIR और शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जा
जांच एजेंसी ने रामपुर के अज़ीम नगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर PMLA के तहत यह जांच शुरू की थी। इनमें आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी परिसर के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन अधिग्रहित की गई थी। रामपुर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, सिंघनखेड़ा गांव में शत्रु संपत्ति (Enemy Property) के रूप में चिन्हित 34 एकड़ जमीन के 45 भूखंडों पर भी अवैध कब्जा किया गया था। जबकि कस्टोडियन द्वारा इस जमीन का लीज पहले ही रद्द किया जा चुका था। गृह मंत्रालय (MHA) के शत्रु संपत्ति संरक्षक ने जिला प्रशासन के सहयोग से इस भूमि का कब्जा वापस ले लिया है।
सरकारी फंड और ठेकों में हेराफेरी
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लोक निर्माण कार्यों के लिए आए फंड को यूनिवर्सिटी के निर्माण में डायवर्ट किया गया। सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों से मिले फंड को चंदे (डोनेशन) के रूप में ट्रस्ट तक पहुंचाया गया। PMLA की धारा 66(2) के तहत ED ने यह जानकारी यूपी पुलिस से साझा की, जिसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को अजीम नगर थाने में BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत नया मुकदमा दर्ज किया गया।
बुलडोजर कार्रवाई और मशीनरी का दुरुपयोग
रामपुर पुलिस द्वारा दर्ज अन्य एफआईआर और चार्जशीट के मुताबिक, वर्ष 2016 के दौरान शहर में वक्फ संपत्ति के किरायेदारों समेत कई परिवारों के घरों को कथित तौर पर आजम खान के इशारे पर ध्वस्त कर दिया गया था। आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद घरों का मलबा ट्रकों में भरकर यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाया गया। इसके अलावा, रामपुर नगरपालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी का इस्तेमाल भी यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर किया गया।
1,170 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति का आकलन
जिला मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 59 इमारतों की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, 114 सेल डीड के जरिए खरीदी गई जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार कैंपस की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है। इसके मुकाबले ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में केवल 178.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया है, जिसमें से 12.29 करोड़ रुपये का चंदा फर्जी पाया गया।
एजेंसी का कहना है कि वैध स्रोतों से कुल लागत का केवल 72.63 करोड़ रुपये ही साबित हो पाया है। शेष 426.46 करोड़ रुपये की राशि सीधे तौर पर अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) है, जिसका कोई संतोषजनक स्रोत ट्रस्ट के पदाधिकारी नहीं बता सके। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को कुर्क किया गया है। (इनपुट: ANI)
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