दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' में सरकारी योजनाओं का शत-प

PM Modi की अध्यक्षता में मंत्रालयों की निगरानी और वेबसाइटों को यूजर-फ्रेंडली बनाने पर जोर

दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' में इन मुद्दों पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि सभी पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ मिले और कोई भी वास्तविक हकदार इनसे वंचित न रह जाए। सूत्रों ने बताया कि 'चिंतन शिविर' में मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने-अपने मंत्रालयों में मुख्य चुनौतियों, कमियों और जरूरी कामों की पहचान करें। उन्होंने बताया कि यह चर्चा दो मुख्य विषयों पर 'स्वयं का विकास' और 'जन विश्वास से जन भागीदारी' पर केंद्रित थी।

जनकल्याण योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों से यह भी कहा गया कि वे नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं और लोगों की भलाई के लिए उठाए गए कदमों के बारे में प्रभावी ढंग से बताएं। उन्होंने बताया कि बैठक में फैसला लिया गया कि आने वाले दिनों में सरकार लोगों तक प्रभावी ढंग से अपनी बात पहुंचाने पर खास जोर देगी। सूत्रों ने बताया कि लगातार दूसरे दिन मंत्रियों को आठ समूहों में बांटा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी समूहों के साथ अलग-अलग बातचीत की और इसके बाद उन्होंने सभी मंत्रियों को संयुक्त रूप से संबोधित भी किया।

प्रमुख योजनाओं की जानकारी लेने और पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश

सूत्रों के अनुसार, बैठक में मंत्रियों से कहा गया कि वे सरकार की 40-45 प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी लें। लोगों को इनके बारे में बताएं और पात्र लाभार्थियों तक इनकी शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि अब से मीडिया से बात करने या कोई भी जानकारी देने से पहले वे मुद्दों और समस्याओं की पूरी जानकारी लेंगे। सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों से कहा गया कि वे चर्चा के दौरान दूसरे मंत्रियों से मिली जानकारी के साथ उन बातों के बारे में भी बताएं, जो उन्होंने खुद साझा की हैं।

शासन, सुधार और योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को 'चिंतन शिविर' के पहले दिन शासन, सुधारों और कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं को लेकर महिलाओं और युवाओं तक पहुंच बनाने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दो-दिन के विचार-विमर्श के दौरान मंत्रियों ने इस बात पर भी चर्चा की कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिये सरकार की सेवा वितरण प्रणाली को कैसे और बेहतर बनाया जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से उनके विचार जाने और उन्हें सरकार के कामकाज के अलग-अलग पहलुओं पर सलाह दी।

'विकसित भारत 2047' की प्राथमिकताओं और मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल पर मंथन

उन्होंने बताया कि बैठक में मंत्रियों ने जिन अन्य मुद्दों पर चर्चा की, उनमें 'जन विश्वास से जन आधार', सरकार के सभी पहलुओं में सुधार और 'विकसित भारत 2047' के लिए प्राथमिकताएं शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस दो-दिवसीय मंथन सत्र का मुख्य उद्देश्य मंत्रालयों और विभागों के काम का जायजा लेना, उनके बीच तालमेल बेहतर करना, सरकार के भविष्य का एजेंडा और योजनाएं तैयार करना और कल्याणकारी योजनाओं एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा करना था।

'विकसित भारत 2047' की रूपरेखा को आगे बढ़ाने पर मंथन

'विकसित भारत' कवायद 2021 से जारी है। लक्ष्य हासिल करने के लिए लघु अवधि और दीर्घ अवधि की रूपरेखा तैयार करने की खातिर सचिवों के 10 क्षेत्र-आधारित समूह बनाए गए हैं। इस कवायद के लिए हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श भी किया गया। तब से 'विकसित भारत 2047' के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं। सूत्रों ने बताया कि मौजूदा 'चिंतन शिविर' ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

योजनाओं की प्रगति, नीति क्रियान्वयन और जन-सेवाओं की समीक्षा पर जोर

'चिंतन शिविर' में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के कार्यान्वयन, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और जन-सेवाएं प्रदान करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री, विभिन्न सुधारों पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने पहले भी अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से कहा था कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना सरकार का मुख्य ध्येय होना चाहिए। इसी तरह की कवायद 21 अक्टूबर 2021 को भी की गई थी। उस समय चर्चा का मुख्य विषय शासन और नीति निर्माण था। 

मंत्रालयों के कामकाज की निगरानी और वेबसाइटों को यूजर-फ्रेंडली बनाने पर जोर

इस कवायद का उद्देश्य सरकार के समक्ष चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मंत्रियों की मदद करना है। हाल में मंत्रियों और मंत्रालयों को कई निर्देश जारी किए गए, जिनमें मंत्रालयों के कार्यों के लिए 'लाइव डैशबोर्ड' बनाना, प्रगति की समीक्षा करना और सुझाव पाने के लिए सभी कर्मचारियों के साथ बातचीत करना शामिल है। सितंबर की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइट को अधिक से अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया था।

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