लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चेन्नई मे

चेन्नई में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा— 'छात्र होने का सार जिज्ञासा और प्रश्न पूछना है'

Leader of Opposition in the Lok Sabha Rahul Gandhi

चेन्नई (तमिलनाडु)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को लोकतंत्र में छात्रों के बीच असहमति और सवाल उठाने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जिज्ञासा अच्छे भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, "पेरियार छात्रों से क्या कहते हैं? किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मानो क्योंकि किसी और ने कहा है। हर बात का विश्लेषण करो और उसकी पड़ताल करो। फिर महान कवि कहते हैं, 'रेत में जितना गहरा कुआँ खोदोगे, उतना ही पानी निकलेगा।'

एक विद्यार्थी होने का मूल तत्व जिज्ञासा

जितना अधिक आप सीखते हैं, उतना ही अधिक ज्ञान का प्रवाह होता है। एक विद्यार्थी होने का मूल तत्व जिज्ञासा है, प्रश्न पूछना है, ज्ञान की प्यास है, और प्रत्येक विद्यार्थी के हृदय में बसी यही जिज्ञासा आपको शक्ति प्रदान करती है। यह आपको प्रश्न पूछने, नई चीजों, नए स्थानों का पता लगाने, एक नए भविष्य की कल्पना करने, अपने भविष्य की कल्पना करने, अपने राज्य के भविष्य की कल्पना करने, अपने मित्रों, अपने परिवार के भविष्य की कल्पना करने की शक्ति देती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह आपको चुनाव करने की क्षमता देती है।

गांधी ने चेन्नई में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को किया संबोधित

"यह जिज्ञासा हवा में नहीं रहती। इसका एक आधार होता है। आपकी जिज्ञासा का आधार क्या है? यह आपकी भाषा है। यह आपकी संस्कृति, आपका इतिहास, आपकी परंपराएं, आपकी भूमि है। यही वह आधार है जहाँ से आप प्रश्न पूछना शुरू कर सकते हैं। इस आधार के बिना जिज्ञासा असंभव है। प्रश्न नहीं पूछे जा सकते, और एक मजबूत भविष्य, एक बेहतर भविष्य का निर्माण नहीं किया जा सकता", गांधी ने चेन्नई में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा। गांधी जी ने यह भी कहा कि जिज्ञासा की नींव भाषा, संस्कृति, परंपरा, इतिहास और भूमि में निहित है, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तमिलनाडु की भाषा, इतिहास और संस्कृति की रक्षा की जाएगी।

तमिलनाडु की महान भूमि पर उपस्थित होना सम्मान की बात

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को राज्य की संस्कृति और पहचान को निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु की महान भूमि पर उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है। जैसा कि मैं अक्सर कहता हूं, मैं हमेशा आपसे - तमिलनाडु के ज्ञान से - कुछ न कुछ सीखता हूं। जैसा कि पेरियार जी ने कहा था, 'किसी के कहने मात्र से किसी बात का अनुसरण न करें। हर बात का विश्लेषण और अन्वेषण करें।' तिरुवल्लुवर जी ने लिखा था, 'रेत में जितना गहरा कुआं खोदोगे, उतना ही पानी निकलेगा; जितना अधिक सीखोगे, उतना ही ज्ञान प्रवाहित होगा।'

आपकी जिज्ञासा की नींव आपकी भाषा

आपकी जिज्ञासा की नींव आपकी भाषा, संस्कृति, परंपरा, इतिहास और भूमि है। हम नरेंद्र मोदी को तमिलनाडु की भाषा, इतिहास और संस्कृति पर हमला नहीं करने देंगे। वह तमिलनाडु को छू भी नहीं पाएंगे।" तमिलनाडु में भाषा का मुद्दा राजनीतिक बहस का एक प्रमुख विषय बना हुआ है, जहां राज्य ने तमिल और अंग्रेजी की अपनी दो-भाषा नीति को बरकरार रखा है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तीन-भाषा फार्मूले का विरोध किया है।

(इनपुट: ANI)

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