ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) की एक टीम इस महीने के अंति

दुर्लभ जंगली बिल्ली कैरागल की मौजूदगी के मिले प्रणाण, अध्ययन की योजना

फाइल फोटो

भोपाल। ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) की एक टीम इस महीने के अंतिम सप्ताह या फरवरी में मंदसौर स्थित गांधी सागर अभयारण्य का दौरा कर सकती है, ताकि वहाँ दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की उपस्थिति का अध्ययन किया जा सके। यह पहल उस समय शुरू हुई जब चीता की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप में गलती से कैराकल की तस्वीरें रिकॉर्ड हो गईं। यह फुटेज ग्लोबल टाइगर फोरम के ध्यान में आया, जिसके बाद विस्तृत अध्ययन की योजना बनाई गई।

29 जून को पहली बार कैराकल की गतिविधि हुआ रिकार्ड

गांधी सागर अभयारण्य के प्रभारी संजय रायखेरे ने बताया कि कूनो नेशनल पार्क से लाए गए तीन चीतों की गतिविधि दर्ज करने के लिए अभयारण्य के अलग-अलग हिस्सों में कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। अभयारण्य के पश्चिमी हिस्से में लगे एक कैमरे में 29 जून को कैराकल की गतिविधि रिकॉर्ड हुई। इसके बाद जून और जुलाई तक बार-बार उसकी उपस्थिति दर्ज की गई।

इससे पहले कौराकल की मौजूदगी के प्रमाण नहीं

इसके बाद यह तय किया गया कि ग्लोबल टाइगर फोरम की टीम यहाँ आकर यह पता लगाएगी किक्या अभयारण्य में एक से अधिक कैराकल मौजूद हैं? यदि हां, तो उनकी संख्या कितनी हो सकती है। मध्य प्रदेश में पहले कोई प्रमाण नहीं था। सूत्रों के अनुसार, गांधी सागर अभयारण्य में इस घटना से पहले मध्य प्रदेश में कैराकल की कोई आधिकारिक या प्रामाणिक उपस्थिति दर्ज नहीं थी। हालाँकि चंबल क्षेत्र में लोग पहले भी इस जानवर को देखने का दावा करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं था।

कैराकल की विशेषता

कैराकल एक पतला, मध्यम आकार का जंगली बिल्ली प्रजाति का जानवर है, जिसकी पहचान उसके कानों के सिरे पर गुच्छेदार बाल और लंबे पैरों से होती है। अफ्रीका में यह सहारा रेगिस्तान के दक्षिणी हिस्सों में व्यापक रूप से पाया जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से राजस्थान में मिलता है। इसके भोजन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा छोटे स्तनधारी जीव होते हैं। यह अत्यंत तेज़ और फुर्तीला होता है। यह अपने से दो–तीन गुना बड़े शिकार को भी गिरा सकता है। उड़ते पक्षियों को पकड़ने के लिए यह 10 फीट तक छलांग लगा सकता है।

बेहतर आवासीय परिस्थितियाँ बनीं कारण

चीता परियोजना शुरू होने के बाद गांधी सागर अभयारण्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। इसके कारण वहाँ शिकार प्रजातियों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। लगभग न के बराबर मानवीय हस्तक्षेप और प्रचुर वन्यजीव उपलब्धता के कारण बेहतर पर्यावरणीय परिस्थितियाँ संभवतः कैराकल को यहाँ बसने के लिए आकर्षित कर रही हैं।

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