सॉफ्टवेयर कंपनी के सीनियर मैनेजर ने चुराया ₹87 करोड़ का 'सोर्स कोड', FIR दर्ज
बेंगलुरु (कर्नाटक)। भारत की सिलिकॉन वैली के नाम से मशहूर आईटी सिटी बेंगलुरु में चोरी का एक ऐसा मामला समाने आया है जिसने पूरे कॉर्पोरेट जगत को हैरान कर दिया है। एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी ने करीब 87 करोड़ रुपये के कथित डेटा चोरी के मामसे में अपने ही पुराने कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पूर्व कर्मचारी पर आरोप है कि उसने गैर कानूनी तरीके से बेहद संवेदनशील 'सोर्स कोड' और प्रोपराइटरी डेटा को चुराया हैै।
सीनियर मैनेजर पर लगा चोरी का आरोप
पुलिस के मुताबिक, चोरी किए गए इस डेटा की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 87 करोड़ रुपये आंकी गई है। बेंगलुरु सिटी पुलिस ने इस मामले में व्हाइटफील्ड CEN क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की है। एक बड़ी टेक्नोलॉजी फर्म, एमेडियस सॉफ्टवेयर लैब्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ है जिसमें कंपनी ने अपने पूर्व कर्मचारी आशुतोष निगम को आरोपी बनाया गया है।
निजी ईमेल से उड़ाया डेटा
FIR के मुताबिक, आशुतोष निगम पर आरोप है कि उसने सीनियर मैनेजर के पद पर रहते हुए कथित तौर पर 11 अक्टूबर, 2025 को कंपनी के काफी गोपनीय 'सोर्स कोड' और सेंसिटिव डेटा को बिना अनुमति अपने पर्सनल ईमेल अकाउंट पर ट्रांसफर कर लिया। कंपनी को इंटरनल रिव्यू के दौरान संभावित डेटा ब्रीच का शक हुआ और बाद में आरोपी से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान, निगम ने कथित तौर पर बिना इजाज़त डेटा ट्रांसफर की बात कबूल की, जिसे वीडियो में रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद, एमेडियस सॉफ्टवेयर लैब्स ने 3 दिसंबर, 2025 को आरोपी की सर्विस समाप्त करते हुए उसे नौकरी से निकाल दिया।
87 करोड़ का भारी नुकसान
कंपनी ने दावा किया है कि चोरी हुए सॉफ्टवेयर और सोर्स कोड की कीमत लगभग 8 मिलियन यूरो है, जो लगभग 87 करोड़ रुपये है, और इस ब्रीच से बिज़नेस को काफी नुकसान हुआ है, साथ ही इसके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को सीधा खतरा है।
आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है, जो कंप्यूटर से जुड़े अपराधों, पहचान की चोरी, और कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करके पहचान बदलकर धोखाधड़ी से संबंधित हैं। जांच शुरू कर दी गई है, और कोर्ट में एक डिटेल्ड रिपोर्ट भी जमा कर दी गई है।