निर्वासित तिब्बती सरकार के सांसदों और वरिष्ठ अधिका

निर्वासित तिब्बतियों ने धर्मशाला में मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि की अर्पित

Exiled Tibetans paid tribute by lighting candles in Dharamshala

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश)। निर्वासित तिब्बती सरकार के सांसदों और वरिष्ठ अधिकारियों समेत 1,000 से ज़्यादा निर्वासित तिब्बतियों ने रविवार को धर्मशाला में कैंडललाइट मार्च निकाला। यह मार्च न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने 'आज़ाद और स्वतंत्र तिब्बत' की मांग करते हुए लोबगा रंगज़ेन के आत्मदाह के एक महीने पूरे होने पर आयोजित किया गया था।

मैकलॉडगंज से भागसूनाग तक चला मार्च

यह मार्च मैकलॉडगंज से शुरू होकर भागसूनाग में खत्म हुआ, जहाँ लोगों ने रंगज़ेन को श्रद्धांजलि दी और तिब्बत के लिए आज़ादी, न्याय और स्वतंत्रता की अपनी मांगें दोहराईं। निर्वासित तिब्बती सरकार के पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन कर्मा येशी ने ANI से बात करते हुए कहा कि यह कैंडललाइट मार्च रंगज़ेन के सम्मान में और उनके आत्मदाह के एक महीने पूरे होने पर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि लोग उनके प्रति एकजुटता दिखाना चाहते थे और संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत के मुद्दे को उठाने और उसे सुलझाने की अपील करना चाहते थे।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह

येशी ने कहा, "हम अपने स्वतंत्रता सेनानी, शहीद लोबगा रंगज़ेन के लिए यह कैंडललाइट मार्च कर रहे हैं, जिन्होंने 2 जुलाई को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किया था। आज उनके सर्वोच्च बलिदान को एक महीना पूरा हो गया है। इसीलिए हम उनके प्रति एकजुटता दिखाने और संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत के मामले पर ध्यान देने और तिब्बत मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने की मांग करने के लिए यह कैंडललाइट मार्च कर रहे हैं।"

मार्च का मकसद रंगज़ेन की आखिरी इच्छाओं और संदेश को भी जीवित रखना

निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्य वांगडु दोरजी ने कहा कि इस सभा का उद्देश्य रंगज़ेन को श्रद्धांजलि देना था और मोमबत्तियाँ "सत्य की रोशनी" का प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि तिब्बती उन मांगों के समर्थन में खड़े हैं जिनके लिए लोगों ने अपनी जान दी थी। दोरजी ने ANI को बताया, "हम उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि देने आए हैं। हमारा मानना ​​है, कि हम इन मोमबत्तियों को सत्य की रोशनी के रूप में थामे हुए हैं और हमारी मांगें वही हैं जिनके लिए हमारे बहादुर शहीदों ने अपनी जान दी है।" तिब्बत की पूर्व सांसद नामग्याल डोलकर ने कहा कि इस मार्च का मकसद रंगज़ेन की आखिरी इच्छाओं और संदेश को भी जीवित रखना था। उन्होंने कहा कि उनका आत्मदाह तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता और तिब्बतियों के एकजुट होने का आह्वान था।

तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग

डोलकर ने कहा, "हम यहाँ शहीद लोबगा रंगज़ेन की याद में एक महीने पूरे होने पर इकट्ठा हुए हैं। हम यहाँ न केवल दुनिया को, बल्कि खुद को भी उनकी आखिरी इच्छाओं और दुनिया व तिब्बती लोगों से की गई उनकी आखिरी अपील की याद दिलाने के लिए आए हैं, और हम ठीक वही कर रहे हैं। जीवन का बलिदान, खुद को जलाकर जान देने का फैसला, तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग, सभी तिब्बतियों से एकजुट होने की अपील कि क्योंकि इतने सालों से हम चीनी सरकार से बातचीत करने का अनुरोध कर रहे हैं, और उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है... मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम अपनी नीति बदलें और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करें क्योंकि हालात बिगड़ते जा रहे हैं।" (इनपुट: ANI)

यह भी पढ़ें: नियोजित हमले को स्थगित करने के बाद सोमवार से अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू: ट्रम्प