MP News : भोपाल। जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना का खर्च तेज़ी से बढ़ा, राज्य पर कर्ज़ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना का खर्च तेज़ी से बढ़ा

MP News : भोपाल। जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा वित्तीय कदम उठाते हुए लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में ₹1,200 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की थी। ढाई साल बाद, वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। नर्मदापुरम में राज्यस्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में वे 1.2531 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ₹1,836 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर किया। 

हालांकि योजना की निरंतरता बनी हुई है, लेकिन सरकारी खजाने पर इसका वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। नवंबर 2025 में मासिक सहायता ₹1,000 से बढ़ाकर ₹1,500 कर दी गई थी और इसे आगे चलकर ₹3,000 तक ले जाने का राजनीतिक वादा भी किया गया है। जो योजना शुरू में एक लक्षित कल्याणकारी पहल थी, वह अब राज्य बजट के सबसे अधिक आवर्ती खर्चों में शामिल हो चुकी है।

लाभार्थियों की संख्या घट रही है। खर्च बढ़ने के बावजूद, योजना से लाभान्वित होने वाली महिलाओं की वास्तविक संख्या धीरे-धीरे घट रही है। योजना की शुरुआत के समय लगभग 1.29 करोड़ लाभार्थी थीं, जो अक्टूबर 2023 तक बढ़कर 1.31 करोड़ हो गई थीं। वर्तमान में यह संख्या घटकर फिर से करीब 1.25 करोड़ रह गई है।

योजना से 5.7 लाख लाभार्थीयों के नाम हटाए

पिछले 30 महीनों में 5.7 लाख से अधिक महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं, जबकि सरकार ने नए नाम जोड़ने पर रोक लगा रखी है। इनमें से लगभग 1.5 लाख महिलाएं 60 वर्ष की आयु पार करने के कारण अपात्र हो गईं। यह वर्ग 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के लिए महत्वपूर्ण माना गया था। सरकारी अधिकारियों ने विधानसभा में पुष्टि की है कि आयु और पात्रता के आधार पर नाम हटाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नए लाभार्थियों को शामिल नहीं किया जा रहा।

योजना की सोच और बढ़ता बोझ

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बताया था कि योजना की परिकल्पना कैसे हुई: एक रात मुझे नींद नहीं आई। सुबह चार बजे मैंने अपनी पत्नी को जगाया और कहा कि मेरी सभी बहनें मुझे अपना भाई मानती हैं। भाई को अपनी बहनों को कुछ देना चाहिए। सालाना मदद से जीवन नहीं बदलता, लेकिन मासिक सहायता उन्हें सम्मान के साथ जीने में मदद करती है।” जब अधिकारियों ने फंडिंग को लेकर चिंता जताई, तो चौहान ने कहा था कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन है।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर

आज यह “आंदोलन” राज्य के लिए बहुत भारी खर्च बन चुका है। केवल 30 महीनों में मध्य प्रदेश ने महिलाओं को कुल ₹48,632.70 करोड़ की राशि ट्रांसफर की है। इसमें से ₹38,600 करोड़ से अधिक राशि जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में दी गई। राज्य के खजाने पर मासिक बोझ ₹1,540 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹1,850 करोड़ हो गया है। वित्त वर्ष 2026–27 के अनुमानों के अनुसार, केवल यह योजना ही राज्य को करीब ₹22,680 करोड़ की पड़ेगी।

यह विशाल खर्च ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की वित्तीय स्थिति पर पहले से ही अत्यधिक दबाव है। पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश रोज़ाना औसतन ₹125 करोड़ का कर्ज़ ले रहा है। राज्य पर कुल बकाया कर्ज़ बढ़कर ₹4,64,340 करोड़ हो गया है, जो राज्य के पूरे वार्षिक बजट से लगभग ₹43,000 करोड़ अधिक है। परिणामस्वरूप, राज्य को हर साल लगभग ₹27,000 करोड़ केवल ब्याज भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। तुलना करें तो दो दशक पहले, कांग्रेस शासन के दौरान, राज्य पर कुल कर्ज़ लगभग ₹20,000 करोड़ था।

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