दिल्ली हाईकोर्ट ने झुग्गी-झोपड़ी (JJ) वासियों के प

झुग्गीवासियों के पुनर्वास पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा- 'कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए सुविधाएं'

Facilities Must Be on Ground': Delhi HC Strict on Slum Relocation

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने झुग्गी-झोपड़ी (JJ) वासियों के पुनर्वास को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि सावदा घेवरा में शिफ्ट किए जा रहे नागरिकों के पुनर्वास में उनके सम्मान से जीने के अधिकार का पूरा ख्याल रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि पुनर्वास नीति के तहत किए गए सभी वादों को सख्ती से जमीन पर उतारा जाए। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है। दरअसल, यह पीठ राकेश बंसल और खुशनुमा खान सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंगल जज के 11 मई 2026 के फैसले को चुनौती दी गई थी।

बुनियादी सुविधाओं पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा पूरा ब्योरा

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सावदा घेवरा पुनर्वास स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई। डिवीज़न बेंच ने प्रशासन से कड़े सवाल पूछते हुए इस बात का पूरा ब्योरा मांगा कि वहां स्कूल, ट्रांसपोर्ट, पानी की सप्लाई, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाएं कैसी हैं। इसके लिए अधिकारियों को बकायदा एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने उठाईं खामियां, कहा- रोजगार से दूर है नया ठिकाना

याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट एन हरिहानन और पंकज सिन्हा सहित वकीलों की एक बड़ी टीम ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि सावदा घेवरा पुनर्वास स्थल पर मार्केट, पानी, बिजली, सुरक्षा और बच्चों की सेफ्टी जैसी बुनियादी चीजों की भारी कमी है। इसके अलावा यह जगह दिल्ली के बाहरी इलाके में है, जो इन परिवारों के मौजूदा आशियाने और कामकाज की जगह से काफी दूर है।

केंद्र सरकार और DUSIB की दलील: 'डिफेंस प्रोजेक्ट के लिए जमीन जरूरी'

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) के वकीलों ने अदालत को बताया कि झुग्गीवासियों के कब्जे वाली यह जमीन देश की सुरक्षा और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को बेहतर तरीके से बसाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।

सभी 717 परिवारों को मिलेगा फ्लैट, सरकार उठाएगी खर्च

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने एक बड़ी बात आई कि सरकार पुनर्वास नीति के तहत लाभार्थियों से लिया जाने वाला अंशदान खुद वहन करेगी। पात्रता के विवाद से परे हटकर सभी प्रभावित झुग्गीवासियों को मकान दिए जाएंगे। प्रशासन के मुताबिक, पुनर्वास के लिए चुने गए कुल 717 परिवारों में से 248 ने अलॉटमेंट स्वीकार कर लिया है और कई परिवार नए फ्लैटों में शिफ्ट भी हो चुके हैं।

हलफनामे में वादों की झड़ी, ट्रांसपोर्ट से लेकर अस्पताल तक का दावा

प्रशासन ने कोर्ट में हलफनामा देकर दावा किया कि सावदा घेवरा पुनर्वास कॉलोनी रेलवे, मेट्रो और बस सेवा से अच्छी तरह जुड़ी हुई है। इलाके में सरकारी और एमसीडी स्कूलों की लिस्ट भी कोर्ट को सौंपी गई। इसके अलावा बिजली कनेक्शन, स्ट्रीट लाइट, पानी की टंकियां, सीवर सिस्टम, पार्क और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने की बात कही गई। पास में ही डिस्पेंसरी और संजय गांधी सरकारी अस्पताल की सुविधा होने का भी दावा किया गया।

मुफ्त इंडक्शन कुकर, पंखा और बस पास देने की तैयारी

अदालत में सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने एक और बड़ा वादा किया। प्रशासन हर विस्थापित परिवार को एक सीलिंग फैन और एक इंडक्शन कुकर मुफ्त देगा। इसके साथ ही DUSIB जल्द से जल्द एलपीजी (LPG) कनेक्शन दिलाने में भी मदद करेगा। यही नहीं, प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सालभर के लिए एसी (AC) बस का मुफ्त पास मिलेगा, जिसे 3 साल तक रिन्यू कराया जा सकेगा। महिलाओं को दिल्ली सरकार की योजना के तहत पहले की तरह मुफ्त बस सफर की सुविधा मिलती रहेगी।

कागजी दावों पर कोर्ट का रुख, 'जमीन पर दिखनी चाहिए सुविधाएं'

हाईकोर्ट ने साफ किया कि कागजों पर तो काफी कोशिशें दिख रही हैं, लेकिन अब यह देखना जरूरी है कि ये सुविधाएं असल में जमीन पर मौजूद हैं या नहीं। कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि DUSIB और L&DO ने हलफनामे में जो भी वादे किए हैं, उनका कड़ाई से पालन होना चाहिए। किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही प्रभावित परिवार के एक सदस्य को शुरुआती 1 साल के लिए दिल्ली मेट्रो में मुफ्त सफर की सुविधा देने का निर्देश दिया गया।

4 दिन के भीतर बनेगा चौबीसों घंटे चलने वाला कैंप ऑफिस

शिकायतों के निपटारे के लिए हाईकोर्ट ने DUSIB को सावदा घेवरा में 4 दिनों के भीतर एक कैंप ऑफिस बनाने का आदेश दिया है। इस दफ्तर में DUSIB, दिल्ली जल बोर्ड और बिजली कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारी चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे, ताकि पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जा सके।

बच्चों के एडमिशन के लिए एमसीडी और शिक्षा विभाग को आदेश

अदालत ने निर्देश दिया है कि विस्थापित परिवारों के बच्चों को पास के सरकारी और एमसीडी स्कूलों में तुरंत दाखिला दिया जाए। कैंप ऑफिस के अधिकारी इस काम में परिवारों की मदद करेंगे। कोर्ट ने इस आदेश को मानने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को कानूनी रूप से बाध्य किया है। अदालत ने चेतावनी दी कि सम्मान से जीने के अधिकार का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई होगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 1 जुलाई 2026 को होगी।

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