मध्यप्रदेश में फर्जी बीमा क्लेम का गोरखधंधा, दर्ज की जाती हैं एक्सीडेंट की झूठी FIR
Madhya Pradesh : मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में रजिस्टर्ड एक ही नंबर की बाइक, स्कूटी, कार, एम्बुलेंस.एक्सीडेंट के अलग‑अलग हादसे बताकर कोर्ट में भारी बीमा क्लेम का दावा ठोक रहे हैं। क्या यह संयोग है ? या किसी बड़े फ्रॉड रैकेट की साज़िश? हमारी टीम ने घुसकर पड़ताल की और जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने और हैरान कर देने वाले हैं कि आखिर ऐसा भी हो सकता है।
मध्यप्रदेश में वाहन बीमा घोटाला सामने आया है। इस घोटाले ने सभी बीमा कंपनियों की नींद हराम कर दी है। वाहन बीमा कंपनियों की अपनी इन्वेस्टिगेशन जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वह और भी हैरान कर देने वाले हैं। पुलिस डॉक्टर और क्लेम लेने वालों का एक गठजोड़ बंधन पूरे नेक्सस की के साथ काम कर रहा है। पहले एक्सीडेंट होता है। फिर अज्ञात वाहन के खिलाफ FIR दर्ज होती है। कुछ दिनों बाद थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहन की खोजबीन। फिर सांठगांठ के बाद सीधे कोर्ट में बीमा के लिए क्लेम ठोक दिया जाता है। एक बाइक या एक कार से अलग अलग जिलों के थाना क्षेत्र में अलग-अलग एक्सीडेंट होते हैं। फिर फर्जी FIR के जरिए लाखों रुपयों का क्लेम ले लिया जाता है। यह एक संगठित फ्रॉड नेटवर्क की गहरी साज़िश है ? हमारी पड़ताल आपको बताएगी सच्चाई क्या है।
हमारी पड़ताल में सामने आया कि एक्सीडेंट्स के दावे एक ही पैटर्न पर हैं।बस बदल जाता है जिला, तारीख औऱ थाना। हैरत की बात देखिए ड्राइवर का नाम वही। बाइक या कार वही। इसके बाद बदलता है सिर्फ जिला और थाना। कभी मालिक स्वयं ड्राइवर के रूप में दिखाई देता है, कभी ड्राइवर खुद मालिक बन जाता है। हर क्लेम में फाइलिंग और दस्तावेज़ पूरी तरह एक जैसे। यह सिर्फ संयोग नहीं लगता, बल्कि एक रणनीति का हिस्सा लगता है। पुलिस रिकॉर्ड और बीमा दस्तावेज़ बताते हैं कि क्लेम प्रक्रिया में कई बार वही दस्तावेज़ बार-बार इस्तेमाल किए गए। कुछ FIR इतने गढ़े हुए हैं कि उनके विरोधाभास तुरंत नजर आते हैं। इस केस में फ्रॉड की छाया साफ दिखाई देती है।
केस वाइज पहली पड़ताल। मामला मध्यप्रदेश के मुरैना औऱ दतिया जिले का है। RTO में रजिस्टर्ड यह एक कार क्रमांक (MP-06-CA-2111) 25 अप्रेल 2023 को दतिया जिले के लोंच थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट करती है। FIR दर्ज होती है। FIR नंबर 54/2023 दर्ज होता है। यहां वाहन मालिक शनि बाथम होता है। इसके बाद यही कार क्रमांक (MP-06-CA-2111) मुरैना जिले के अलग अलग थाना क्षेत्र में सिविल लाइन थाने में 16 नवम्बर 2022 को एक्सीडेंट करती है। यंहा वाहन मालिक बदल जाता है। यहां वाहन मालिक योगेंद्र परमार हो जाता है। फिर यह कार मुरैना जिले के नूराबाद थाना क्षेत्र में 3 मार्च 2020 को एक्सीडेंट करती है। यहां फिर वाहन मालिक बदल गया। यंहा वाहन मालिक राजेश शर्मा आ जाता है। इसके बाद यही कार 12 मार्च 2024 को फिर से नूराबाद थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट होता है, यंहा वाहन मालिक बदल गया। राजेश शर्मा की जगह फिर योगेन्द्र परमार प्रकट हो जाता है। यही कार से 17 जून 2018 को जौरा थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट दिखाया जाता है, यंहा वाहन मालिक फिर बदल गया, योगेन्द्र परमार की जगह राजेश शर्मा को हाजिर हो जाता है। साल 2017 में इसी कार से मुरैना के देवगढ़ थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट होता है। वाहन मालिक वही राजेश शर्मा। यानि, कि कार क्रमांक (MP-06-CA-2111) एक्सीडेंट की घटनाएं 6। वाहन एक ही है, लेकिन तीन वाहन मालिकों ने अपना-अपना हक जताकर क्लेम के लिए कोर्ट में केस लगा दिया है।
दूसरी पड़ताल औऱ बेहद चौंकाने वाली है। यहां तीन गाड़ी होती हैं। इनमें एक गाड़ी एम्बुलेंस नंबर पर रजिस्टर्ड, एक बाइक और एक्टिवा, लेकिन चौंकाने वाला पहलू देखिए। तीनों का वाहन मालिक विजय कुमार केवट है. इसकी तस्वीर भी देखिए। विजय कुमार केवट तीन अलग अलग जिलों में 4 एक्सीडेंट करता है, हर जगह वाहन मालिक अनुराग कन्नौजिया होता है। विजय पहले सिवनी जिले के धूमा थाना क्षेत्र में। फिर दो पन्ना जिले के रायपुरा थाना क्षेत्र में और चौथा जबलपुर जिले के पनागर थाना क्षेत्र में। पहला एक्सीडेंट सिवनी जिले में वाहन क्रमांक MP-04-MD-2656 से होता है, जो एम्बुलेंस के नाम पर रजिस्टर्ड है। जिसकी FIR नंबर 77/2024 है। फिर विजय कुमार केवट बाइक क्रमांक (MP-20-ZG-8135 से पन्ना जिले में दो एक्सीडेंट करता है।
जिनका FIR नंबर 173/2024 है। इसके बाद विजय कुमार केवट जबलपुर जिले में एक्टिवा वाहन क्रमांक (MP-20-SY-5264) से एक्सीडेंट करता है। जिसकी FIR नंबर 453/2024 दर्ज है। इसी तरह बैतूल जिले 4 थानों में एक्सीडेंट की 6 FIR दर्ज होती हैं। एक्सीडेंट करने वाला एक। वाहन चालक गब्बर राठौर। लेकिन FIR 6 दर्ज होती हैं। गब्बर राठौर अपनी बाइक क्रमांक (MP-48-MY-2420) से पहली FIR बैतूल बाजार थाने में 16 नवम्बर 2021 को दर्ज कराता है। दूसरी FIR 22 जुलाई 2022। तीसरी FIR 3 जनवरी 2023 को आमला थाने में। चौथी FIR 4 जुलाई 2023 को कोतवाली थाने में। पांचवी FIR 2 अगस्त 2023 को और छंटवी FIR 8 दिसंबर 2024 को बैतूल बाजार थाने में दर्ज कराता है। सभी में बाइक नंबर एक ही (MP-48-MY-2420) दर्ज होता है। है न अचरज की बात। 6 एक्सीडेंट। मालिक एक। क्लेम की राशि केस कोर्ट में विचाराधीन है।
क्लेम पास करने के लिए कई बार गवाह, डॉक्यूमेंट और पुलिस रिपोर्ट को..
इसमें कभी वाहन मालिक खुद ड्राइवर बन गया तो कभी ड्राइवर वाहन मालिक बन गया। यह भी कहानी सुनिए औऱ देखिए बड़ा मजा आएगा। इंदौर जिले के देहात में स्थित सिमरोल थाना क्षेत्र में 4 अगस्त 2024 को गुजरात पासिंग एक कार क्रमांक (GJ-09-BA-1430) से एक्सीडेंट होता है। वाहन मालिक प्रतीक गोस्वामी और ड्राइवर उमेश शाक्य होता है। FIR नंबर 366/2024 दर्ज हो जाती है। इस हादसे में 3 लोग घायल होकर बीमा क्लेम कर देते हैं। फिर 21 नवम्बर 2024 को इसी कार क्रमांक (GJ-09-BA-1430) से इंदौर देहात के बेटमा थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट होता है। यंहा वाहन मालिक प्रतीक गोस्वामी ही रहता है, लेकिन ड्राइवर पीयूष कटारिया हाजिर हो जाता है। 2 जनवरी 2023 को धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र में एक्सीडेंट होता है, लेकिन यहां वाहन और मालिक दोनो बदल गए। वाहन क्रमांक (MP-09-WL-4727) मालिक मयूर सिंह, लेकिन हैरानी की बात देखिए अब यंहा पहले केसों में वाहन मालिक प्रतीक गोस्वामी इस केस में ड्राइवर की भूमिका में पेश होता है। सांसे थामकर जरा ओर दिलचस्पी से देखिए बीमा क्लेम के इस खेल का रहस्य। अभी तक प्रतीक गोस्वामी कार से एक्सीडेंट कर रहा था। बाइक से भी कर दिया। 1 अगस्त 2020 को धार जिले के धर्मपुरी थाने में एक बाइक क्रमांक (MP-10-MS-2117) से एक्सीडेंट हुआ। बाइक मालिक अश्विन है, लेकिन ड्राइवर फिर वही प्रतीक गोस्वामी पेश। अभी तो रुको 20 अक्टूबर 2024 को प्रतीक गोस्वामी फिर से वही गुजरात पासिंग कार क्रमांक (GJ-09-BA-1430) से धार के धर्मपुरी थाना क्षेत्र के एक्सीडेंट करता है। इस केस में प्रतीक गोस्वामी खुद ही वाहन मालिक और खुद ड्राइवर की भूमिका में पेश होता है।
इसका खुलासा तब हुआ जब हमारी टीम ने FIR और बीमा क्लेम फाइलें मिलान कीं। हर क्लेम में दो चीज़ें मिलती रहीं बाइक और कार का पंजीकरण नंबर और डॉक्यूमेंट्स में एक जैसा भाषा‑फ्रेम। पर बाकी सब बदलता रहा तारीख, ड्राइवर का नाम, और हादसे का परिदृश्य। यानी, ठगों का सीधा गणित जितने ज़्यादा हादसे, उतने ज़्यादा क्लेम और उतना ही ज़्यादा मुनाफा। सोचिए, अगर एक बाइक और कार से चार हादसे दिखाए जा सकते हैं, तो पूरे प्रदेश में कितनी ऐसी बाइक्स और कारें सड़कों पर फर्राटे से दौड़ रही होंगी ? ये सिर्फ़ बीमा कंपनियों के साथ ठगी नहीं है। ये सीधे-सीधे आम जनता की जेब पर भी डाका है। चूंकि ऐसे में कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए प्रीमियम की राशि बढ़ाती जा रही है। एक ही रीजन में बार-बार एक नंबर/टेम्पलेट दिखे तो यह सिस्टमिक फ्रॉड का संकेत है। क्लेम पास करने के लिए कई बार गवाह, डॉक्यूमेंट और पुलिस रिपोर्ट को भी मैनिपुलेट किया जाता है।
मध्यप्रदेश में सड़क दुर्घटना बीमा क्लेम के ऐसे हजारों मामले हैं, जिनमें एफआईआर में कुछ और लिखा है और हकीकत कुछ और ही है। दरअसल, दुर्घटना बीमा क्लेम की रकम हासिल करने के लिए दलाल और पुलिस का एक पूरा रैकेट काम कर रहा है। फर्जी क्लेम के इस कारोबार में पीड़ित परिवार के साथ क्लेम की राशि का 50 फीसदी का सौदा होता है। पीड़ित परिवार भी अनजाने में पैसों के लालच के चलते कानून का उल्लंघन कर रहा है। साल 2018 तत्कालीन CID एडीजी रहे अब मध्यप्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी कैलाश मकवाणा ने सभी जिलों में इस तरह के केस की जांच करने के लिए एडिशनल SP स्तर का अधिकारी नोडल ऑफिसर नियुक्त करने के लिए पत्र लिखा था। यानि कि साल 2018 में ही बीमा क्लेम का घोटाला पकड़ में आ चुका था। तब से बीमा कंपनियां ठगी जा रही हैं। उत्तरप्रदेश के संभल में इसी तरह का बीमा क्लेम घोटाला उजागर होने के बाद सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को SIT गठित करने के आदेश दिए, लेकिन MP में अमल नहीं हुआ। फरवरी 2025 में बीमा कंपनियों ने MP हाईकोर्ट की शरण ली और रिट-पिटीशन लगाई। 13 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद PTRI (पुलिस प्रशिक्षण शोध संस्थान) को आदेश दिए कि सभी जिलों में इसके लिए एक SIT गठित की जाए। PTRI एआईजी टीके विद्यार्थी का कहना है कि PTRI ने हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी पुलिस मुख्यालय की CID शाखा को भेजकर SIT गठित करने के लिए पत्र भेज दिया है। ऐसे फॉल्स सामने आए हैं, SIT इसकी जांच करेगी।
बीमा क्लेम घोटाले का ये खुलासा सिर्फ मध्यप्रदेश का मामला नहीं। ये सिस्टम की कमज़ोरियों की पोल है। अगर एक बाइक या कार से चार-चार हादसे दिखाए जा सकते हैं, तो सोचिए और कितने घोटाले दबे होंगे। अब सवाल यही है—कब तक जनता और कंपनियां इस बीमा माफिया के शिकंजे में फंसी रहेंगी ? यह एक संकेत है कि कैसे सिस्टम में छेद और संगठित फ्रॉड बड़े पैमाने पर काम कर सकते हैं। हमारी टीम आगे की पड़ताल जारी रखेगी और जंहा ज़रूरी, रिकॉर्ड्स, लोगों और डिजिटल ट्रेल को सार्वजनिक करेगी। बीमा सुरक्षा का जरिया है, लेकिन यहां इसे मुनाफे की जालसाजी बना दिया गया। अब देखने वाली बात ये है कि इस फर्जीवाड़े पर कब तक और कैसी कार्रवाई होती है।
रिपोर्ट - सतेन्द्र सिंह भदौरिया, ब्यूरो चीफ, मध्यप्रदेश
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