रीवा में जच्चा-बच्चा की मौत पर भड़का आक्रोश, परिवार ने मुआवजे से किया इंकार
रीवा: संजय गांधी अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण जान गंवाने वाली प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। पीड़ित पिता राम शिरोमणि मिश्रा अपने पूरे परिवार और ग्रामीणों के साथ शहर के व्यस्ततम सिरमौर चौराहे पर तंबू गाड़कर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं।
मरने से पहले कल्पना ने लगाया था गंभीर आरोप
धरने पर बैठे पीड़ित पिता ने बताया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान कल्पना डिलीवरी रूम से बाहर भागी थी, उनके सीने से लिपटकर रोते हुए कहा था- "पापा मुझे बचा लो, ये लोग मुझे मार डालेंगे, इन्होंने मुझे झांसे की सुई लगा दी है"। परिजनों का आरोप है कि कर्मचारी व डॉक्टरों द्वारा पैसों की मांग की जा रही थी और मांग पूरी न होने पर प्रसूता के साथ घोर संवेदनहीनता और क्रूरता बरती गई, जिसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।
"दो लाख नहीं, न्याय चाहिए"
राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा की गई मुआवजे की घोषणाओं को सिरे से खारिज करते हुए पिता राम शिरोमणि मिश्रा ने दो टूक कहा- "सरकार 2 लाख तो क्या अगर 2 करोड़ रुपये भी देगी, तब भी हम स्वीकार नहीं करेंगे। हमें हमारी बेटी और उसके बच्चे की जिंदगी की कीमत नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।
दो महिला डॉक्टरों व दो नर्सों को किया गया निलंबित
इस मामले में अब तक प्रशासन द्वारा दो महिला डॉक्टरों व दो नर्सों को निलंबित करने और अधीक्षक को पद से हटाने की कार्रवाई की गई है। हालांकि, परिजनों का कहना है कि सिर्फ प्रशासनिक निलंबन कोई सजा नहीं है। परिजनो ने मांग की है कि घटना के जिम्मेदार डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल कॉलेज के डीन व अस्पताल प्रबंधन पर नामजद एफआईआर दर्ज कर आपराधिक मामला चलाया जाए, जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे चौराहे से नहीं हटेंगे।
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