बगहा: गंडक नदी के पास मगरमच्छ के हमले से किसान की दर्दनाक मौत, इलाके में दहशत
बेतिया: बगहा में इन दिनों मगरमच्छों का आतंक जारी है। कभी रिहायशी इलाकों में तों कभी मुख्य सड़क पर मगरमच्छ निकलने का सिलसिला थमा नहीं कि नदी किनारे गए किसान की मौत मगरमच्छ के हमले से हो गई। दरअसल वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के सेमरीडीह गांव के पास नदी में पानी छूने गए भीम बीन नामक किसान पर एकाएक मगरमच्छ ने हमला कर दिया। मगरमच्छ के हमले में ग्रामीण भीम बीन की दर्दनाक मौत हो गई।
इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल
बताया जा रहा है कि मगरमच्छ के हमले की इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के मुताबिक, सेमरीडीह गांव निवासी भीम बीन अपने घर से कुछ दूरी पर खेत में शौच करने गए थे। शौच के बाद जब वे पास से गुजर रही सहायक नदी में पानी छूने पहुंचे तभी मगरमच्छ ने अचानक उन पर जकड़ लिया। मगरमच्छ नें हमले के बाद भीम बीन को नदी में खींच लिया।
काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को काबू में किया गया
वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने उन्हें नदी की तरफ जाते देखा था। लिहाजा लोगों ने इसकी जानकारी मृतक के पोते सुग्रीव बीन और उनकी पत्नी को दी। जानकारी मिलते ही परिजन नदी के आसपास उनकी तलाश में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को काबू में कर भीम बीन को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
ग्रामीणों में बना भय का माहौल
वहीं, घटना की सूचना मिलने के बाद वाल्मीकिनगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बगहा अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया। मगरमच्छ के हमले की इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने नदी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मगरमच्छों से बचाव के लिए वन विभाग प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग किया है।
चंबल के बाद गंडक नदी मगरमच्छों का दूसरा सबसे बड़ा ठिकाना
बता दें, भारत में चंबल नदी के बाद नेपाल से निकलने वाली नारायणी गंडक नदी मगरमच्छ अधिवास का दूसरा बड़ा ठिकाना है। यही वज़ह है कि गंडक में हजारों की तादाद में मगरमच्छ हैं जो सहायक नहरों, नालों और सहायक छोटी नदियों में पहुंच गए हैं। यहां तक कि कई बार ऐसे मगरमच्छ रिहायशी इलाकों में देखें जा रहें हैं, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ गया है। हालांकि वन विभाग की ओर से सतर्कता की अपील की गई है। साथ ही समय-समय पर पीड़ितों को मुआवजा भी दिया जा रहा है, लेकिन मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम नहीं लें रहीं हैं।
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