पैतृक जमीन बचाने की लड़ाई: दगड़खेड़ी के किसानों का भगवानपुरा तहसील में धरना जारी
खरगौन (मध्यप्रदेश)। "सरकार हमें हमारी पैतृक जमीन से बेदखल करना चाह रही हैं। जबकि हम कई पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। जिनके पावती पट्टे बने हुए हैं, फिर भी शासन प्रशासन जमीन छीनकर उद्योगपतियों को देने में लगी हैं।" यह दर्द है उन किसानों का है जो अपनी ही जमीन बचाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अपनी खेती-किसानी और अस्तित्व को बचाने के लिए ये किसान सोमवार से तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी पुश्तैनी जमीनें छीनकर उद्योगपतियों के हवाले करना चाहता है।
तहसील परिसर बना आंदोलन का केंद्र
किसानों ने रात भी तहसील परिसर में गुजारी और भोजन भी वहीं पर बनाकर खाया। धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी। मंगलवार को भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। जागृत आदिवासी दलित संगठन के बलिराम सोलंकी और शिवराम कनासे ने कहा कि, वर्ष 2022से लगातार मुख्यमंत्री कलेक्टर एसडीएम और तहसील में आवेदन देकर भूमि अभिलेखों में सुधार की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन सरकार ने करीब 250 किसानों के खेतों को शासकीय भूमि बताते हुए औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना बनाई।
भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
जो किसानों के साथ धोखा हैं, जिसका हम पुरजोर विरोध करते हैं।पूर्व में अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य को इस मामले से अवगत कराया था। वहीं किसानों ने कहा कि 500 एकड़ जमीन ढाई सौ किसानों के नाम पर हैं, जिनके पावती पट्टे बने हुए हैं। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड चालबाजी से गायब कर दिए गए जिसके चलते किसान कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इससे ये साबित होता हैं कि सरकार आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करना चाह रही हैं।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बता दे कि मंगलवार तक कोई भी जिले के आला अधिकारी धरना स्थल पर किसानों के बीच नहीं पहुंचे। वहीं तहसीलदार संजय चौहान ने कहा कि किसानों की समस्या के निराकरण हेतु जिले के उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया हैं। किसानों का कहना हैं कि,सरकारी रिकॉर्ड में सुधार कर जमीन वापस दी जाए। नहीं तो कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होना पड़ेगा।
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