चितावा थाने के तत्कालीन SHO समेत 6 पर FIR, दलित युवक से मारपीट और गैरकानूनी हिरासत का आरोप
डीडवाना-कुचामन (राजस्थान)। जिले के चितावा थाना पुलिस पर दलित युवक के साथ कथित मारपीट और गैरकानूनी हिरासत का गंभीर मामला सामने आया है। कुचामन के एसीजेएम न्यायालय के आदेश पर चितावा थाने में थानाधिकारी तेजाराम, कांस्टेबल इन्द्राज मीणा सहित छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच मकराना के वृत्ताधिकारी (सीओ) विक्की नागपाल को सौंपी गई है।
कथित रूप से की गई मारपीट
परिवादी विजय कुमार मेघवाल निवासी घाटवा का आरोप है कि उसके भाई बलजीत मेघवाल मजदूरी के बकाया भुगतान की मांग करने गया था। इस दौरान उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। आरोप है कि जब बलजीत शिकायत दर्ज कराने चितावा थाने पहुंचा तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उसे थाने से भगा दिया।
थाने में रोककर हवालात में किया बंद
शिकायत के अनुसार, अगले दिन विजय कुमार अपने भाई और परिजनों के साथ दोबारा थाने पहुंचा और रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में रोककर हवालात में बंद कर दिया। उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। परिवादी का आरोप है कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि उसके कान का पर्दा फट गया और उसे चिकित्सकीय उपचार कराना पड़ा।
कोर्ट की शरण में पहुंचा परिवादी
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस से न्याय नहीं मिलने पर उसने कुचामन के एसीजेएम न्यायालय में इस्तगासा दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए चितावा थाने में तत्कालीन थानाधिकारी तेजाराम, कांस्टेबल इन्द्राज मीणा, जितेंद्र, हेमराज सहित छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेश की पालना में चितावा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। अब पूरे प्रकरण की जांच मकराना के सीओ विक्की नागपाल करेंगे। मामले को लेकर परिवादी पक्ष के अधिवक्ता तेजपाल पुरी ने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज हुई है और उन्हें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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