पहली बार- सागर में हुआ जल पक्षियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, देखे गये यूरोप के दुर्लभ पक्षी
सागर। सागर जिले में पहली बार जल पक्षियों की गणना का वैज्ञानिक स्तर पर आयोजन किया गया। दक्षिण वनमंडल के तहत आयोजित 'एशियन वाटर बर्ड सेंसस 2026' के दौरान वन विभाग की टीमों ने चार रेंज के अंतर्गत स्थित 9 प्रमुख तालाबों में सर्वेक्षण किया। विशेष अभियान में कुल 82 प्रजातियों के जल पक्षियों की पहचान हुई।
क्या है खास
सर्वेक्षण की खास बात यह रही कि इसमें दक्षिण-पूर्वी यूरोप में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति 'रूडी शेलडक' भी देखी गई। ब्लैक रेड स्टार्ट जैसे विदेशी पक्षियों की मौजूदगी ने विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित किया है।
प्रोटोकॉल के तहत गणना
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह गणना प्रशिक्षित टीमों द्वारा तय प्रोटोकॉल के तहत की गई। सुबह और शाम के समय दूरबीन व कैमरों की मदद से पक्षियों की पहचान और संख्या दर्ज की गई। पता चला कि सागर क्षेत्र के जलस्रोत प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
पारिस्थितिकी संतुलन का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप और एशिया के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का यहां ठहराव, जल की गुणवत्ता और पारिस्थितिकी संतुलन का संकेत देता है। यह सर्वे भविष्य में जैव विविधता संरक्षण और जलाशयों के बेहतर प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएगा।
नियमित रूप से होगी गणना
वन विभाग ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस तरह की गणना को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा, ताकि जल पक्षियों की बदलती संख्या और प्रजातियों पर नजर रखी जा सके।