आदित्य हत्याकांड में सजा काट रहे सपा के पूर्व प्रत

आरपी यादव के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद सदर सीट पर बढ़ी सियासी हलचल

कौन संभालेगा आरपी यादव की सियासी विरासत

रायबरेली: सदर विधानसभा क्षेत्र में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। आदित्य हत्याकांड में सपा के पूर्व प्रत्याशी आरपी यादव के सजायाफ्ता (दंडित) होने के बाद अब उनके चुनावी मैदान से बाहर होने की स्थिति ने पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। वर्ष 2022 में भाजपा की अदिति सिंह ने 1,02,429 वोट पाकर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा के राम प्रताप यादव को 95,254 मत मिले थे। दोनों के बीच महज 7,175 वोट का अंतर रहा था।

सपा किसे बनाएगी अपना प्रत्याशी

आरपी यादव के सजायाफ्ता होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सपा अब सदर सीट पर किसे अपना प्रत्याशी बनाएगी। पार्टी को एक और मजबूत जनाधार वाले नए चेहरे की तलाश है। वहीं, दूसरी ओर आरपी यादव से जुड़े मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने की चुनौती भी है।

आरपी यादव ने हुंकार भरते हुए कहा...

जेल जाते समय पुलिस वाहन में बैठे आरपी यादव के एक बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। मीडिया के सामने उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "विधायक बनने में भले ही हमें कुछ देर के लिए रोक दिया गया है, लेकिन समय बदलेगा।" उनके इस बयान के राजनीतिक मायने तलाशे जाने लगे हैं। समर्थकों के बीच इसे संघर्ष जारी रखने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या परिवार से ही चुना जाएगा अगला प्रत्याशी

आरपी यादव के इस बयान के बाद यह कयास भी तेज हो गए हैं कि सपा जनसहानुभूति का लाभ लेने के लिए उनके परिवार से ही किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। अगर ऐसा होता है तो चुनावी मुकाबले में आरपी यादव की सियासी विरासत और सहानुभूति को भुनाने की कोशिश हो सकती है।

भाजपा के पास सदर सीट पर पहले से मजबूत आधार

वहीं, भाजपा के पास सदर सीट पर पहले से मजबूत आधार है। ऐसे में सपा के प्रत्याशी चयन पर 2027 के चुनावी समीकरण काफी हद तक निर्भर करेंगे। फिलहाल राजनीतिक दलों के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों की निगाहें सपा के अगले कदम पर टिकी हैं। 

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