भिंड में कॉरपोरेट की तर्ज पर हो रही थी गांजा तस्करी, नेटवर्क का भंडाफोड़
भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में पुलिस ने एक अत्यंत संगठित गांजा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो पूरी तरह से “कंपनी मॉडल” पर काम कर रहा था। इस नेटवर्क में स्पष्ट रूप से तय भूमिकाएं, निश्चित मुनाफा हिस्सेदारी और आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग सुरक्षा बजट तक निर्धारित था। यह मामला तब सामने आया जब बरोही थाना पुलिस ने इस सप्ताह एक कार से 22 किलोग्राम से अधिक गांजा बरामद कर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया।
कैसे हुआ खुलासा
पुलिस को मदनपुरा डैम के पास एक संदिग्ध हुंडई कार नजर आई। वाहन रोकने के प्रयास पर चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन थोड़ी देर तक पीछा करने के बाद पुलिस ने कार को रोक लिया। तलाशी में 22.2 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। कार में सवार राजेन्द्र बघेल, पंकज शुक्ला और राजकुमार शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया है। वहीं, गिरोह के दो मुख्य आरोपी, जिनमें कथित फाइनेंसर (वित्तपोषक) भी शामिल है, अभी फरार हैं।
कंपनी की तरह चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह गिरोह बिल्कुल कॉरपोरेट ढांचे की तरह काम करता था। एक फाइनेंसर पूंजी उपलब्ध कराता था। एक मैनेजर पूरे ऑपरेशन का समन्वय करता था। सप्लायर वितरण का काम संभालते थे। एक स्टोर कीपर स्टॉक का प्रबंधन करता था, मुनाफे का बंटवारा पहले से तय था। पुलिस के अनुसार, ओडिशा से लगभग ₹2 लाख मूल्य का गांजा लाया गया। स्थानीय बाजार में इसे करीब ₹10 लाख में बेचा गया। इसमें से ₹5 लाख सीधे फाइनेंसर को मिलते थे। शेष राशि अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी। करीब ₹50,000 को कानूनी और सुरक्षा खर्चों के लिए अलग रखा गया था।
ओडिशा से भिंड तक सप्लाई चेन
गांजा ₹5,000 प्रति किलो की दर से ओडिशा से खरीदा जाता था। भिंड और आसपास के क्षेत्रों में इसे ₹20,000–₹25,000 प्रति किलो में बेचा जाता था। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सप्लायर नियुक्त थे। नेटवर्क का विस्तार मुरैना जिले और इटावा (उत्तर प्रदेश) तक था।
डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप पर कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते थे, जैसे—फाइनेंसर, मैनेजर, स्टोरकीपर औरलेन-देन डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के जरिए किया जाता था, ताकि नकद लेन-देन से बचा जा सके।
जेल से बने संपर्क
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में से एक पहले के एक मामले में जेल में रहते हुए अंतरराज्यीय तस्करों से संपर्क स्थापित किया था। इसी नेटवर्क के जरिए बाद में यह गिरोह खड़ा किया गया। तस्करी से हुई कमाई से करीब ₹12 लाख की कार सहित अन्य संपत्तियां भी खरीदी गईं।
इधर, बरोही थाना प्रभारी अतुल भदौरिया ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है। अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों की पहचान की जा रही है। जांच के आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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