गौरव गोगोई ने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश भेजी गई दो असम महिलाओं को वापस लाने की मांग की
गुवाहाटी (असम)। असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने शनिवार को विदेश मंत्रालय से असम के नागांव जिले की दो महिलाओं का पता लगाने और उन्हें वापस लाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया, जिन्हें जून में भारत-बांग्लादेश सीमा पार भेज दिया गया था और जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
मुस्तत मुमताज बेगम के मामलों में हस्तक्षेप की मांग
विदेश मंत्री को लिखे पत्र में, गोगोई ने बागरीगुड़ी की मुस्तत जहानारा बेगम और ढिंग गांव की मुस्तत मुमताज बेगम के मामलों में हस्तक्षेप की मांग की, जिन्हें इस साल 13 और 14 जून की दरमियानी रात को सीमा पार भेज दिया गया था। गोगोई ने अपने पत्र में कहा, “यह एक ऐसा मामला है जिसमें माननीय गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा आपके मंत्रालय को पहले ही पक्षकार बनाया जा चुका है। इसलिए मैं आपसे व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध करता हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोनों महिलाओं का पता लगाया जाए और यदि वे वास्तव में बांग्लादेश में हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए।”
दोनों महिलाओं को 2019 में विदेशी घोषित किया
दोनों महिलाओं को 2019 में नागांव स्थित विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित किया गया था और उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी। गोगोई ने बताया कि अप्रैल 2026 में उच्च न्यायालय ने पहले के फैसलों को रद्द कर दिया और दोनों मामलों को न्यायाधिकरण को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया गया था। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, जहानारा बेगम 29 मई को और मुमताज बेगम 30 मई को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुईं। गोगोई ने बताया कि इसके तुरंत बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया।
जहानारा बेगम के मामले में भी इसी तरह के निष्कर्ष दर्ज
उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों महिलाओं को न्यायाधिकरण से नया फैसला प्राप्त करने और उच्च न्यायालय में इसे चुनौती देने का प्रभावी अवसर नहीं दिया गया। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के 3 सितंबर के आदेशों का हवाला देते हुए गोगोई ने कहा कि न्यायालय ने इसके बाद हुई घटनाओं का गंभीरता से संज्ञान लिया है। “मुमताज बेगम के मामले में, न्यायालय ने पाया कि न्यायाधिकरण कार्यालय ने अपनी राय की प्रमाणित प्रति जारी करने में जानबूझकर और स्वेच्छापूर्वक देरी की थी और माना कि इसमें ‘कानूनी दुर्भावना’ का मामला बनता है,” उन्होंने कहा। “न्यायालय ने आगे कहा कि राज्य तंत्र ने वास्तव में उन्हें उच्च न्यायालय में जाने के अपने अधिकार का प्रयोग करने से रोका था। जहानारा बेगम के मामले में भी इसी तरह के निष्कर्ष दर्ज किए गए,” गोगोई ने आगे कहा।
महिलाओं को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश
उन्होंने 2 जून को नागांव के जिला आयुक्त द्वारा जारी निष्कासन आदेशों का भी उल्लेख किया, जिसमें महिलाओं को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था, जबकि वे पहले से ही राज्य की हिरासत में थीं। “मुमताज बेगम के मामले में, न्यायालय ने आदेश को ‘हास्यास्पद’ बताया और माना कि परिस्थितियों में इसका पालन करना संभव नहीं था,” गोगोई ने कहा। कांग्रेस सांसद के अनुसार, दोनों महिलाओं को बाद में सीमा सुरक्षा बल के हवाले कर दिया गया और 13 और 14 जून की दरमियानी रात को सीमा स्तंभ संख्या 1339/एमपी के पास गेट नंबर 2 के माध्यम से सीमा पार भेज दिया गया।
मामले को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने का निर्देश देने का आग्रह
गोगोई ने कहा कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पहले ही विदेश मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है ताकि बांग्लादेश में महिलाओं का पता लगाने और उन्हें भारत वापस लाने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें, जिससे वे अपने कानूनी उपायों का पालन कर सकें। इस मामले को देखते हुए, गोगोई ने मंत्रालय से बांग्लादेश सरकार के साथ तत्काल इस मुद्दे को उठाने और दोनों महिलाओं का पता लगाने में सहायता मांगने का अनुरोध किया। उन्होंने मंत्रालय से ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और सिलहट स्थित सहायक भारतीय उच्चायोग को संबंधित बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ इस मामले को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने का निर्देश देने का भी आग्रह किया।
भारत वापसी के लिए उचित कांसुलर सहायता और यात्रा दस्तावेजों की मांग
इसके अलावा, उन्होंने आवश्यक औपचारिकताओं के अधीन, उनकी भारत वापसी के लिए उचित कांसुलर सहायता और यात्रा दस्तावेजों की मांग की और अनुरोध किया कि दोनों महिलाओं के परिवारों को उचित संपर्क सूत्र के माध्यम से उनका पता लगाने के प्रयासों की प्रगति के बारे में सूचित किया जाए। गोगोई ने कहा, “नागांव में दो परिवार महीनों से अपनी बेटी, मां और पत्नी की तलाश कर रहे हैं; इन दोनों महिलाओं को सरकारी हिरासत में लेने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार भेजने के बाद यूं ही गायब नहीं हो जाना चाहिए।”
(इनपुट: ANI)
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