नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा नदी का बढ़ा जलस्तर, गोंडा में जारी किया हाई अलर्ट
गोंडा: लगातार हो रही बारिश और नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए गोंडा प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है. अधिकारियों के अनुसार, अगर जलस्तर बढ़ने का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो अगले तीन दिनों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
कहां कितना दर्ज किया गया जलस्तर
शनिवार सुबह 8 बजे एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर 104.970 मीटर दर्ज किया गया, जो डेंजर लेवल 106.070 मीटर से 1.10 मीटर नीचे है। यहां हाई फ्लड लेवल 107.616 मीटर निर्धारित है। वहीं अयोध्या में नदी का जलस्तर 91.080 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो डेंजर लेवल 92.730 मीटर से नीचे है। दोनों स्थानों पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
घाघरा में कुल 73,029 क्यूसेक पानी का हो रहा प्रवाह
घाघरा में इस समय कुल 73,029 क्यूसेक पानी का प्रवाह हो रहा है। इसमें गिरिजा बैराज से 47,181 क्यूसेक, शारदा बैराज से 24,400 क्यूसेक और सरयू बैराज से 1,448 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बढ़ते डिस्चार्ज के चलते नदी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए तटीय गांवों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बाढ़ खंड विभाग की टीमें तटबंधों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं, जिन स्थानों पर नदी का दबाव अधिक है, वहां कटान रोकने और धारा को नियंत्रित करने के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
जलस्तर बढ़ने के साथ मगरमच्छ और घड़ियाल के बहाव में आने की भी आशंका
नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ मगरमच्छ और घड़ियाल के बहाव में गोंडा क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील घाटों और नदी तटों पर चेतावनी बोर्ड लगवाने शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और बच्चों पर विशेष निगरानी रखने की अपील की गई है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर भी प्रशासन की पैनी नजर
अपर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि नेपाल से छोड़े गए पानी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क और अलर्ट मोड पर है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी 24 घंटे तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर भी प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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