गोरखपुर में आफत की बारिश: पेड़ गिरने से झोपड़ी में दबकर तीन की मौत, कुल चार लोगों की जान गई
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हुई भारी बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। गोरखपुर जिले में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई, जहां पेड़ गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम चार लोगों की जान चली गई। कैंपियरगंज इलाके में एक झोपड़ी पर पेड़ गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि बांसगांव में एक व्यक्ति की मौत पेड़ गिरने से हुई। भाजपा सांसद रवि किशन ने शहर के जलभराव वाले इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति
गोरखपुर के जिलाधिकारी और कलेक्टर दीपक मीणा ने ANI से बातचीत में बताया कि क्षेत्र में बने गहरे दबाव (डिप्रेशन) के मद्देनज़र पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत लगभग सभी क्षेत्रों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी पहले ही जारी की जा चुकी थी। उन्होंने कहा, "इस दबाव की प्रकृति को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लगभग सभी अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई थी। कैंपियरगंज में तीन लोगों की जान गई है।"
डीएम मीणा ने बताया कि प्रभावित परिवारों को तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए सभी तहसीलों और ब्लॉकों में प्रशासनिक टीमें तैनात कर दी गई हैं। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई और हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए सभी ब्लॉकों और तहसीलों में एम्बुलेंस तैनात कर दी गई हैं।
घटना का विस्तृत विवरण देते हुए डीएम ने कहा, "कैंपियरगंज में पीड़ितों की मौत तब हुई जब वे एक झोपड़ी के अंदर बैठे थे और उस पर पेड़ गिर गया। इसके अलावा, बांसगांव में एक व्यक्ति की मौत पेड़ गिरने से हुई, जिससे मृतकों की कुल संख्या चार हो गई है।"
हताहतों और राज्य की प्रतिक्रिया पर आगे जानकारी देते हुए डीएम मीणा ने कहा, "पोस्टमार्टम और प्राकृतिक आपदा के तहत निर्धारित आर्थिक सहायता के साथ-साथ अन्य सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता की प्रक्रियाएं पूरी की जा रही है।"
जलभराव से जनता परेशान, स्थानीय निवासियों का बयान
लंबे समय तक बने रहे जलभराव ने शहर के कई इलाकों में निवासियों और दुकानदारों को भारी परेशानी में डाल दिया। एक स्थानीय निवासी ने ANI से कहा, "जैसी स्थिति आज हम देख रहे हैं, वैसी कभी नहीं देखी। पहले भी बारिश होती थी और पानी जमा होता था, लेकिन एक घंटे में निकल जाता था; आज 4-5 घंटे हो गए हैं और पानी वहीं का वहीं है। यह पूरी तरह से नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह इस समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान करे... हर तरफ पानी है और दुकानदार परेशान हैं; उन्हें बाल्टियों से पानी बाहर निकालना पड़ रहा है। इसके लिए पूरी तरह नगर निगम जिम्मेदार है।"
जनता की इस नाराज़गी के बीच भाजपा सांसद रवि किशन ने जलभराव वाले इलाकों का दौरा किया और बारिश की तीव्रता को असामान्य बताया, साथ ही कहा कि प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां कर ली हैं।
पानी के घटते स्तर का आकलन करते हुए रवि किशन ने कहा, "पानी अब कम हो रहा है। अगर बारिश दो-तीन घंटे रुक जाए तो जमा हुआ पानी जरूर निकल जाएगा। यहां स्थापित नालियां हैं और पानी उनसे होकर बाहर निकलेगा। इस बारिश की तीव्रता असामान्य थी। पिछले 15-19 वर्षों में किसी ने इतनी भारी बारिश नहीं देखी। यह लगभग बादल फटने जैसा था। पूरा शहर जलमग्न हो गया था, लेकिन अब कई इलाकों से पानी घट रहा है। यदि आगे कुछ घंटों तक बारिश न हो तो और भी पानी निकल जाएगा। प्रशासन हमेशा तैयार रहता है... हमने सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं और महादेव से प्रार्थना कर रहे हैं कि बारिश थम जाए। अगर ऐसा होता है, तो शहर एक-दो दिन में सभी इलाकों में सामान्य स्थिति में लौट आएगा।"
लखनऊ में ऐतिहासिक इमारत को नुकसान
खराब मौसम का असर राज्य की राजधानी लखनऊ पर भी पड़ा, जहां लगातार बारिश के दबाव में ऐतिहासिक हुसैनाबाद गेट का एक हिस्सा ढह गया। इस घटना के बाद आसपास के इलाके में तुरंत यातायात प्रतिबंध लगा दिए गए।
इससे पहले शनिवार को भारी बारिश और मौसम संबंधी चेतावनियों को देखते हुए प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया था। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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