गवर्नर ने पूछा- क्या आदिवासियों के बच्चे सरकार के कार्यक्रमों में केवल डांस करने के लिए हैं
भोपाल। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनजातीय वर्ग के प्रति अधिकारियों के उदासीन रवैये पर गुरुवार को मप्र की राजधानी में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मंच से ही अफसरों को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या आदिवासी समाज का उपयोग केवल सरकारी आयोजनों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित है?
राज्यपाल ने उठाए सवाल
राज्यपाल ने बेहद तल्ख लहजे में प्रशासन से पूछा साथ ही हैरानी जताई कि भारत सरकार से मिले आदिवासी उपयोजना के ₹299 करोड़ मात्र एक वर्ष में लैप्स (व्यर्थ) कैसे हो गए?
उन्होंने पूछा कि ट्राइबल डिपार्टमेंट से कोई विभाग यह क्यों नहीं पूछता कि पैसा कहाँ और कैसे खर्च करना है?
उन्होंने बताया कि ₹12 लाख की लागत से बनी आंगनबाड़ियों की स्थिति दयनीय है। दरवाजे प्लास्टिक के हैं, खिड़कियाँ छोटी हैं और न हवा आती है न रोशनी। उन्होंने सवाल किया कि "पैसा कहाँ लग गया?"
राज्यपाल ने पूछा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति क्यों की जा रही है?
राज्यपाल की नाराजगी की वजह
राज्यपाल ने कहा कि आदिवासी वर्ग का आज भी शोषण हो रहा है। उन्होंने अफसरों से सीधे पूछा कि क्या आदिवासियों के बच्चे सिर्फ डांस करने के लिए हैं? क्या सरकार के कार्यक्रमों में उनकी भूमिका बस इतनी ही है? उन्होंने नाराजगी जाहिर की कि राज्य में 21% आबादी आदिवासियों की है, लेकिन हर विभाग को आवंटित बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा है।
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों के विकास के नाम पर भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की तर्ज पर यहाँ भी बजट और पारदर्शिता के लिए सख्त कानून होने चाहिए।
राज्यपाल के सख्त रूख से हड़कंप
राज्यपाल के इस कड़े रुख ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी कल्याण के लिए आने वाला पैसा जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए, न कि फाइलों में या घटिया निर्माण कार्यों में।
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