उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधा

वाराणसी में ग्राफ्टिंग तकनीक की ट्रेनिंग, 10 राज्यों के 30 युवा कृषि उद्यमी हुए शामिल

Grafting Training in Varanasi, 30 Young Entrepreneurs Join from 10 States

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) [भारत]: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में सब्जी फसलों में नर्सरी प्रबंधन और ग्राफ्टिंग तकनीकों पर पांच दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में 10 राज्यों के 30 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन और ग्राफ्टिंग तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था, ताकि वे सब्जी उत्पादन की उत्पादकता, गुणवत्ता और लाभप्रदता बढ़ा सकें। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनंत बहादुर ने सोमवार को अपने स्वागत भाषण में देश भर के विभिन्न राज्यों से प्रशिक्षण में भाग लेने आए सभी प्रशिक्षुओं का स्वागत किया। उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीकों के महत्व, उनके लाभों और सब्जी उत्पादन में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ग्राफ्टेड पौधों के उपयोग से मिट्टी जनित रोगों का प्रभाव कम हो सकता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पौधों की वृद्धि और उत्पादन में सुधार हो सकता है।

किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

इस अवसर पर कृषि विस्तार वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने ग्राफ्टिंग तकनीकों को किसानों के खेतों तक व्यापक रूप से सुलभ बनाने और अधिक से अधिक किसानों को इसमें शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों का प्रभावी प्रसार तभी संभव है जब उद्यमी स्वयं इन तकनीकों को अपनाएं, इनके लाभों का अनुभव करें और अन्य किसानों तक इनका प्रचार-प्रसार करें।

ग्राफ्टिंग से बेहतर उपज और गुणवत्ता पर जोर

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कृषि उद्यमियों को संबोधित करते हुए ग्राफ्टिंग तकनीकों के कारणों, विधियों और लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि ग्राफ्टिंग तकनीकें पौधों को मिट्टी जनित रोगों के प्रति अधिक सहनशील बनाती हैं, प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधों की बेहतर स्थापना सुनिश्चित करती हैं और उच्च गुणवत्ता व अधिक उपज प्राप्त करने में सहायक होती हैं। उन्होंने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, उचित रोपण, पौधों की देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान की।

बैंगन और टमाटर की ग्राफ्टिंग का होगा अभ्यास

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, प्रशिक्षकों ने गुणवत्तापूर्ण और स्वस्थ सब्जी के पौधों की तैयारी, बीज चयन और उपचार, वैज्ञानिक नर्सरी तैयार करना, बुवाई, सिंचाई और पोषण प्रबंधन, रोग और कीट प्रबंधन तथा पौधों की देखभाल के बारे में जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, बैंगन और टमाटर सहित प्रमुख सब्जी फसलों के लिए ग्राफ्टिंग तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।

रूटस्टॉक और सायन के चयन की दी जानकारी

किसानों को रूटस्टॉक और सायन के उचित चयन, ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, ग्राफ्ट यूनियन तैयार करना, ग्राफ्टेड पौधों की देखभाल और खेत में रोपण एवं प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि ग्राफ्टिंग तकनीक से उगाए गए पौधे मिट्टी जनित रोगों और विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। इसके उपयोग से फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होता है, साथ ही किसानों की लाभप्रदता भी बढ़ती है। इस कार्यक्रम में डॉ. ए.एन. सिंह और डॉ. डी.पी. सिंह उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी ने किया।

किसानों ने तकनीक को बताया उपयोगी

प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों ने ग्राफ्टिंग और नर्सरी प्रबंधन तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई और इन्हें व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के लिए उपयोगी और लाभदायक बताया।

(एएनआई)

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