GST काउंसिल के फैसले भरोसे पर आधारित शासन की ओर बड़ा कदम: CII
नई दिल्ली: कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने कहा है कि GST काउंसिल की ओर से कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और प्रवर्तन शक्तियों को तर्कसंगत बनाने के फैसले भारत में आर्थिक सुधारों के अगले चरण के लिए मिसाल बन सकते हैं। इससे भरोसे पर आधारित शासन और सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिलेगा। CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक, ये फैसले कारोबारियों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए आनुपातिक कार्रवाई और नियमों में अधिक स्पष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हैं। बनर्जी ने कहा, "GST काउंसिल के फैसले एक ऐतिहासिक संस्थागत सुधार के रूप में खास पहचान के हकदार हैं।" उन्होंने केंद्र सरकार के नेतृत्व और प्रवर्तन शक्तियों व करदाताओं के अधिकारों से जुड़े बदलावों पर सहमति बनाने में राज्य सरकारों की भूमिका की सराहना की।
गिरफ्तारी की शक्तियां हटाने और मुकदमे की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
8 अक्टूबर को लिए गए फैसलों में केंद्रीय GST अधिनियम की धारा 69 को हटाकर गिरफ्तारी की शक्तियां समाप्त करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, मुकदमा चलाने के लिए निर्धारित वित्तीय सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने, धारा 132 के तहत कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और सजा तय करने में न्यायिक विवेक को अधिक महत्व देने का फैसला भी शामिल है। CII ने कहा कि इन बदलावों से वास्तविक कारोबारी विवादों और प्रक्रियागत गलतियों को जानबूझकर किए गए धोखाधड़ी और कर चोरी के मामलों से अलग करने में मदद मिलेगी। हालांकि, गंभीर उल्लंघनों के मामलों में आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी। इन फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी कानूनी संशोधन भी करने होंगे।
आपराधिक कार्रवाई के डर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं
बनर्जी ने कहा, "इस सुधार की अहमियत सिर्फ यह नहीं है कि कुछ प्रवर्तन शक्तियां वापस ली जा रही हैं। बल्कि यह है कि GST काउंसिल ने माना है कि प्रभावी कर प्रशासन के लिए आपराधिक सजा के खतरे पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।" CII ने 26 अक्टूबर को जारी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के सर्कुलर का भी उल्लेख किया। यह सर्कुलर GST रजिस्ट्रेशन, टैक्स नोटिस और मामलों के निपटारे से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए जारी किया गया था। इन निर्देशों में धोखाधड़ी के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत, नोटिस में स्पष्टता और मामलों के निष्पक्ष व सोच-समझकर निपटारे पर जोर दिया गया है। CII के मुताबिक, इन उपायों के साथ तेजी से रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की स्थिति बेहतर हो सकती है। साथ ही, ऐसे विवादों में भी कमी आ सकती है जिनसे बचा जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सभी राज्यों और संबंधित क्षेत्रों में इन फैसलों को एकसमान तरीके से लागू करना जरूरी होगा।
अन्य क्षेत्रों में भी लागू हो सकता है GST काउंसिल का मॉडल
CII ने कहा कि GST काउंसिल का सहमति पर आधारित कामकाज टैक्स व्यवस्था से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों में सुधारों के लिए भी मॉडल बन सकता है। इनमें भूमि उपयोग, निर्माण की अनुमति, श्रम प्रशासन, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं के कनेक्शन और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कारोबारियों को अक्सर कई स्तरों के नियमों और प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।
'भरोसे पर आधारित शासन का मतलब कार्रवाई कमजोर करना नहीं'
बनर्जी ने कहा, "भरोसे पर आधारित शासन का मतलब प्रवर्तन को कमजोर करना नहीं है। इसका मतलब कार्रवाई को अधिक सटीक, निष्पक्ष और प्रभावी बनाना है।" उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को बेहतर दस्तावेजीकरण, मजबूत आंतरिक नियंत्रण और स्वैच्छिक नियम अनुपालन के जरिए इन सुधारों का जवाब देना चाहिए।
(ANI)
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