भोपाल। मप्र के ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्र

मध्य प्रदेश में ड्यूटी से गायब रहने की आदत नहीं सुधारी तो हफ्ते में 6 दिन करना होगा काम

मध्य प्रदेश में ड्यूटी से गायब रहने की आदत नहीं सुधारी तो हफ्ते में 6 दिन करना होगा काम

भोपाल। मध्य प्रदेश के ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय (वल्लभ भवन), सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति को लेकर सख्ती काफी बढ़ा दी गई है।

​हाजिरी रजिस्टर की जांच

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधिकारियों ने सुबह 10 बजे प्रमुख विभागों में पहुँचकर हाजिरी रजिस्टर की जाँच की। अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने भी औचक निरीक्षण किया।

समय के पाबंद रहें कर्मचारी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारियों की कार्यशैली और समय की पाबंदी में सुधार नहीं हुआ, तो वर्तमान में लागू 5-डे वर्किंग सप्ताह को बदलकर फिर से 6 दिन का कार्य दिवस लागू किया जा सकता है।

​अनुपस्थिति की सूची भेजी

लंच ब्रेक के बाद दफ्तर से नदारद रहने वाले अधिकारियों (SO से लेकर एडिशनल सेक्रेटरी तक) की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दी गई है।

45 मिनट की देरी से 500 फाइलों पर प्रभाव

​डॉ. आरके मिश्रा (पूर्व लोक प्रशासन सलाहकार) के अनुसार, देरी से आने का सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ता है। ​एक सेक्शन में औसतन प्रतिदिन 25-40 फाइलें मूव होती हैं। यदि सेक्शन ऑफिसर 30-45 मिनट की देरी से आता है, तो कम से कम 10-12 फाइलों की प्रोसेसिंग रुक जाती है। ​अनुमान है कि अधिकारियों की देरी की वजह से एक दिन में करीब 400-500 फाइलों का मूवमेंट प्रभावित होता है।

10 से 4 बजे तक विशेष निगरानी

​अधिकारियों की आवाजाही पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष निगरानी रखी जा रही है। उपस्थिति संबंधी पूरी जानकारी शाम 6 बजे तक एकत्र की जाती है। मालूम हो कि ​वल्लभ भवन में 1600 कर्मचारी-अधिकारी (1200 मंत्रालय सेवा, 400 अन्य), ​सतपुड़ा भवन में 1700 कर्मचारी-अधिकारी और ​विंध्याचल भवन में 2100 कर्मचारी-अधिकारी हैं। 

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