कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने वकील अर्क कुमार नाग

चुनाव आयोग के फैसले पर कोर्ट सख्त, अधिकारियों की हटाने की कार्रवाई ठहराई सही

High Court Backs EC’s Transfer of Officials

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के ही अधिवक्ता अर्क कुमार नाग की उन दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिनमें चुनाव आय़ोग द्वारा पश्चिम बंगाल के आईएएस, आईपीएस समेत दूसरे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को हटाने का विरोध किया गया था। कोर्ट ने सटीक तरह से विधानसभा चुनाव कराने बाबत चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम को उचित करार दिया।

अधिकारियों को हटाने के फैसले को दी थी चुनौती

कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता अर्क कुमार नाग ने दो जनहित याचिका दायर की थी। एक जनयाचिका आईएएस और आईपीएस जैसे 46 आला अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा हटाने से संबंधित थी तो दूसरी जनहित याचिका बीडीओ, ओसी जैसे 256 अधिकारियों से संबंधित था। कलकत्ता हाई कोर्ट को मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करने से मना कर दिया।

चुनाव आयोग के कदम को बताया उचित

खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं के मद्देनजर यह टिप्पणी की कि चुनाव आयोग ने अधिकारियों को हटाया और फिर उस स्थान पर दूसरे अधिकारियों को लाया। इससे कोई शून्यता पैदा नहीं हुई और ना ही प्रशासन व पुलिस के काम में रूकावट हुई। विधानसभा चुनाव बिना किसी बाधा और सटीक हो, इसलिए चुनाव आयोग द्वारा उठाया कदम उचित है।

तबादलों पर छिड़ा सियासी घमासान

गौरतलब है कि राज्य में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव घोषणा होते ही शीर्ष के अधिकारियों को हटाया गया था और बाद में अधिक संख्या में नीचले स्तर पर भी अधिकारियों को हटाया गया। इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी की ओर से विरोध और भाजपा की ओर से समर्थन की राजनीति की शुरू है।

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